राढ़ू बहुउद्देशीय जलाशय योजना पर केंद्र की नजर, राज्य सरकार के पाले में गेंद — रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
रांची। रांची जिले के सिल्ली प्रखंड में प्रस्तावित राढ़ू बहुउद्देशीय जलाशय योजना को लेकर अब केंद्र और राज्य के बीच पत्राचार तेज हो गया है। यह महत्वाकांक्षी योजना, जो वर्ष 1980 में अस्तित्व में आई थी, एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि इस परियोजना की प्रगति अब राज्य सरकार के स्तर पर लंबित है।
दरअसल, श्री संजय सेठ ने बीते सितम्बर महीने में नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात की थी। उन्होंने राढ़ू जलाशय परियोजना की वर्तमान स्थिति से अवगत कराते हुए इस योजना को शीघ्र आरंभ कराने का अनुरोध किया था। इस पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय मंत्री ने अब लिखित रूप में जवाब भेजा है।
अपने पत्र में श्री पाटिल ने कहा है कि —
“ऐसी सिंचाई परियोजनाओं में राज्य सरकार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। केंद्र सरकार तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है, परंतु परियोजना की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) और अन्य मूल्यांकन कार्य राज्य स्तर पर लंबित हैं। राज्य सरकार द्वारा आवश्यक पहल किए जाने के बाद ही केंद्र स्तर पर अगली कार्यवाही संभव है।”
केंद्रीय मंत्री के इस पत्र के बाद रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन को एक विस्तृत पत्र लिखकर मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
अपने पत्र में श्री सेठ ने कहा है कि —
“राढ़ू बहुउद्देशीय जलाशय योजना न केवल सिल्ली और राहे क्षेत्र के जल संकट को स्थायी रूप से समाप्त करेगी, बल्कि किसानों को सिंचाई सुविधा, स्थानीय लोगों को रोजगार और क्षेत्र में औद्योगिक विकास के नए अवसर भी प्रदान करेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस परियोजना से किसी प्रकार का विस्थापन नहीं होगा, जिससे स्थानीय जनता को किसी भी प्रकार की हानि नहीं होगी।”
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि राज्य सरकार इस योजना पर विशेष ध्यान दे और केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर इसे शीघ्र आरंभ करने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
क्या है राढ़ू बहुउद्देशीय जलाशय योजना?
यह परियोजना स्वर्णरेखा नदी की सहायक राढ़ू नदी पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सिंचाई, पेयजल, जलविद्युत उत्पादन और औद्योगिक जल आपूर्ति की दीर्घकालिक व्यवस्था करना है।
इस योजना के अंतर्गत—
- नदी पर बांध का निर्माण,
- पाइपलाइन आधारित सिंचाई प्रणाली,
- स्थानीय जल विद्युत उत्पादन,
- पेयजल आपूर्ति नेटवर्क, तथा
- औद्योगिक उपयोग के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
परियोजना का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यह है कि इससे किसी भी परिवार का विस्थापन नहीं होगा, क्योंकि निर्माण क्षेत्र आबादी रहित क्षेत्र में प्रस्तावित है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस योजना के शुरू होने से सिल्ली और राहे प्रखंड के सैकड़ों गांवों को सिंचाई और पेयजल की स्थायी सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र के हजारों किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से जुड़ा महत्व
वर्तमान में राढ़ू जलाशय परियोजना को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के AIBP (Accelerated Irrigation Benefit Programme) घटक के अंतर्गत शामिल किया गया है। इस योजना में केंद्र सरकार द्वारा 60 प्रतिशत अनुदान (केंद्रांश) का प्रावधान है, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को वहन करनी है।
अधिकारियों के अनुसार, यदि राज्य सरकार डीपीआर को अंतिम रूप देकर केंद्र को भेज दे, तो परियोजना को शीघ्र मंजूरी मिल सकती है। यह सिल्ली, राहे और आसपास के इलाकों में जल संकट से जूझ रही ग्रामीण आबादी के लिए जीवनदायिनी परियोजना साबित हो सकती है।
स्थानीय अपेक्षाएँ और संभावनाएँ
स्थानीय जनप्रतिनिधि और किसान संगठन लंबे समय से इस योजना के कार्यान्वयन की मांग करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि यह परियोजना शुरू हो जाती है तो रांची जिला के ग्रामीण क्षेत्र में जल संकट, कृषि निर्भरता और पलायन की समस्या पर उल्लेखनीय नियंत्रण पाया जा सकेगा।
रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ के अनुसार, यह केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण पुनर्जागरण का आधार स्तंभ है — जो जल, कृषि और रोजगार तीनों मोर्चों पर क्षेत्र के जीवन को बदल सकती है।
अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर केंद्र और राज्य के बीच की प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाते हैं, ताकि चार दशक से लंबित यह योजना वास्तविक धरातल पर उतर सके और सिल्ली-राहे की जनता को राहत मिल सके।
Reviewed by PSA Live News
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10:33:00 pm
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