रांची। दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में 10 जनवरी शनिवार को 913 वे खिचड़ी भंडारे का आयोजन हुआ । जिसमें 1400 लोंगो ने प्रसाद ग्रहण किया । अभी 16 दिसम्बर 2025 से धनुर्मास व्रत के अंतर्गत प्रतिदिन बालभोग नैवेद्य में भगवान् को पोंगल के ही भोग लगाये जा रहे हैं । इसलिये इस शनिवार को भी खिचड़ी के बदले में पोंगल महाभोग का ही भंडारा किया गया । ऐसे खिचड़ी और पोंगल में कुछ मशालें का अंतर होता है। पोंगल में हल्दी नहीं डाले जाते हैं एवं दाल के साथ गोटा फुलाये हुये मूँग,उरद , कच्चे मटर और आलू का मात्रा अधिक होता है । यह बड़े ही स्वादु व्यञ्जन है । माना जाता है कि लक्ष्मी की अवतारिका श्रीगोदाम्बा जी भगवान् को पतिरूप में प्राप्त करने की इच्छा से धनुर्मास का व्रत किया । व्रत शुरु करने के पहले संकल्प किया कि अंजन ,काजल और सुरमा न लगाऊँगी , तेल ,इत्र भी न लगाऊँगी , पोंगल का ही भोग लगाऊँगी और उस भोग को ही पाऊँगी । तबसे दिव्यदेशिय मंदिरों में धनुर्मास व्रत के पूरे एक माह तक भगवान् को पोंगल के ही भोग निवेदित किये जाते हैं ।
आज ( खिचड़ी) पोंगल महाभोग का भंडारा श्री विकास शर्मा धर्मपत्नी श्रीमती रूचिता शर्मा और श्री अश्विनी मिश्र धर्मपत्नी श्रीमती खुशबू मिश्र की ओर से जबकि दिनभर का भोग निवेदन किया श्री उत्तम कुमार धर्मपत्नी श्रीमती डिम्पल । तीनों ही यजमान राँची निवासी हैं ।
913 वाॅ खिचड़ी भंडारा में पोंगल महाप्रसाद का आयोजन हुआ
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