षट्तिला एकादशी का व्रत बुधवार को मनाये जायेंगे
दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में षट्तिला एकादशी व्रत का मान सबके लिये 14 जनवरी बुधवार को है। भगवान भूवन भास्कर - ऋषिकेश पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को ही रात्रि : 9•38 बजे संक्रमण करेंगे । इसी के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे तथा खरमास (धनुर्मास) की समाप्ति हो जाएगी । मकर संक्रांति का यह शास्त्रोक्त नियम है कि प्रदोष के बाद रात्रि में किसी भी समय संक्रांति लगती है तो उसका पुण्यकाल दूसरे दिन होता है । इस प्रकार मकर संक्रांति खिचड़ी का पर्व 15 जनवरी गुरुवार को मनाया जाएगा। स्नान दान के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।15 जनवरी गुरुवार को मकर संक्रांति और एक महीने से चल रहे धनुर्मास श्रीगोदा - रंगनाथ महोत्सव का पांचारात्र आगम विधि से समापन किये जायेंगे ।
माघ मास के कृष्ण पक्ष की जो एकादशी है वह 'षट्तिला' के नाम से विख्यात है, जो सब पापों का नाश करने वाली है। इस दिन भली भांति स्नान करके पवित्र शुद्ध भाव से देवाधिदेव श्रीविष्णु वेंकटेश्वर की पूजा करें ।कोई भूल हो जाने पर राम ,कृष्ण, नारायण आदि नामोंच्चारण करें । रात को जागरण और होम करें । नैवेद्य आदि सामग्री से शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले देवदेवेश्वर श्रीहरि तिरुपति बालाजी की पूजा करें । आज के दिन तिल से स्नान करें ,तिल का उबटन लगायें, तिल से होम करें, तिल मिलाया हुआ जल पिये , तिल का दान करें और तिल को भोजन के काम में ले इस प्रकार छः कामों में तिल का उपयोग करने से यह एकादशी षट्तिला कहलाती है,जो सब पापों का नाश करने वाली है ।
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8:17:00 pm
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