राँची। नववर्ष के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र, चौधरी बगान, हरमू रोड में विश्व शांति, आध्यात्मिक जागरण और सकारात्मक संकल्पों के साथ नये वर्ष का स्वागत हर्षोल्लास एवं गरिमामयी वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिससे पूरे परिसर में शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि महानन्द झा, पूर्व महाप्रबंधक, उद्योग विभाग, झारखंड ने कहा कि आज विश्व जिन संघर्षों, तनावों और अस्थिरताओं से गुजर रहा है, उसका मूल कारण मानव के भीतर बढ़ता स्वार्थ है। उन्होंने कहा कि विश्व शांति की स्थापना के लिए बाहरी साधनों से अधिक आंतरिक शांति और रूहानी प्रकम्पनों के प्रसार की आवश्यकता है। मानव ने अपने शांत स्वरूप को स्वार्थ की परतों के भीतर छिपा दिया है, जिसे पुनः जागृत कर ही हम न केवल समाज बल्कि विश्व की अर्थव्यवस्था और समृद्धि को भी शिखर तक पहुँचा सकते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. रोहित झा, कैंसर रोग विशेषज्ञ, रिम्स ने कहा कि नववर्ष पर उपहार देने की परंपरा तो है, लेकिन सबसे बड़ा और मूल्यवान उपहार दूसरों के प्रति शुभ भावनाएँ, शुभकामनाएँ और दुआएँ देना है। उन्होंने कहा कि “जो हम देते हैं, वही हमें लौटकर मिलता है” और शुभ भावना में अपार शक्ति होती है, जो मन, शरीर और समाज—तीनों को स्वस्थ बनाती है।
पूजा अग्रवाल, अध्यक्ष, समर्पण शाखा, मारवाड़ी युवा मंच ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जीवन में बोल और कर्म—दोनों में दिव्यता का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बोलने से पहले सोचने की आदत हमारे शब्दों को शक्तिशाली बनाती है और किसी को आहत होने से बचाती है। साथ ही, कोई भी कर्म करने से पहले आधा मिनट परमात्मा को याद करने से कर्मों की शुभ गति बढ़ती है और जीवन में स्थायी खुशी आती है।
डॉ. जयप्रकाश गुप्ता, पूर्व विधायक, राँची ने कहा कि बीते वर्ष की खट्टी-मीठी स्मृतियों से सीख लेकर पुरानी गलतियों और कमजोरियों को न दोहराने का संकल्प लेना ही नववर्ष का सच्चा स्वागत है। उन्होंने लोगों से साहस के साथ आगे बढ़ने और नए वर्ष को सकारात्मक दृष्टि से अपनाने का आह्वान किया।
डॉ. रानी प्रगति, पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीतिशास्त्र, राँची विश्वविद्यालय ने कहा कि नववर्ष में स्वयं के लिए सबसे बड़ा उपहार उच्च और शुद्ध विचार हैं। शुद्ध विचार स्वाभाविक रूप से शुद्ध कर्मों को जन्म देते हैं, जिससे भविष्य आशीर्वादों से भर जाता है। सही मानसिकता होने पर भाग्य अपने आप अनुकूल बन जाता है।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी संस्थान की निर्मला बहन ने कहा कि नववर्ष के शुभागमन पर आध्यात्मिक परिवर्तन, सकारात्मक संकल्प और आत्म-निरीक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नए वर्ष के संकल्प अक्सर लिए तो जाते हैं, लेकिन उन्हें निभाया नहीं जा पाता। यदि हर दिन की शुरुआत दो मिनट परमपिता परमात्मा की याद और उनके वरदानों को स्वीकार करने से की जाए, तो संकल्प दृढ़ होते हैं और जीवन में प्रतिदिन नवीनता की अनुभूति होती है। उन्होंने वर्तमान समय को परिवर्तन का काल बताते हुए कहा कि शांति सागर परमात्मा सहनशीलता और सहयोग की अनुभूति कराते हुए नए सतयुगी विश्व की स्थापना के कार्य को गति दे रहे हैं।
नववर्ष के अवसर पर भय, निराशा और घृणा जैसी नकारात्मक भावनाओं की शांति तथा रहम, प्रेम और करुणा जैसे मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान में प्रातः से संध्या तक विशेष राजयोग ध्यान द्वारा रूहानी प्रकम्पन प्रेषित किए गए। कार्यक्रम का आरम्भ गाइडेड मेडिटेशन से हुआ, जिसने उपस्थित सभी लोगों को गहन शांति का अनुभव कराया।
इस अवसर पर साकेत बिहारी (पूर्व बैंक मैनेजर), डॉ. सुषमा (गुर्दा रोग विशेषज्ञ), सुनील कुमार गुप्ता (पूर्व एजीएम, एसबीआई, रिम्स), राजेश बिहारी (समाजसेवी) तथा कृष्णा बथवाल (समाजसेवी) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आध्यात्मिक संदेश को कला और संगीत के माध्यम से और भी प्रभावशाली बना दिया।
समग्र रूप से यह आयोजन नववर्ष में विश्व शांति, मानवता और आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक सशक्त संदेश बनकर उभरा।
Reviewed by PSA Live News
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11:21:00 am
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