हाईकोर्ट की सख्ती से प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप, ACB जांच और संपत्ति जब्ती के संकेत
रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) की अधिग्रहित जमीन पर ‘अतिक्रमण’ और ‘रजिस्ट्री घोटाले’ में शामिल सफेदपोशों की उलटी गिनती शुरू हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और सख्ती के बाद अब उन अफसरों में हड़कंप है, जिन्होंने अपनी कलम की ताकत का इस्तेमाल सरकारी जमीन को रेवड़ियों की तरह बांटने में किया था।
बड़गाईं अंचल: भ्रष्टाचार का ‘कंट्रोल रूम’
पूरे मामले का केंद्र बड़गाईं अंचल कार्यालय रहा है। सूत्रों के अनुसार, जांच की पहली गाज उन अंचल अधिकारियों (CO) पर गिरने वाली है जिन्होंने रिम्स की अधिग्रहित जमीन की रजिस्ट्री और म्यूटेशन को हरी झंडी दी।
सूत्र बताते हैं कि इस खेल में कई राजस्वकर्मी, एलआरडीसी (LRDC) और नगर निगम के अफसर भी शामिल रहे।
‘ऊपर’ तक थे तार: LRDC और निगम पर भी जांच की आंच
जब कुछ म्यूटेशन फाइलें अंचल स्तर पर रिजेक्ट की गईं, तो भ्रष्ट नेटवर्क ने ‘प्लान-B’ अपनाया। LRDC कार्यालय के माध्यम से अवैध म्यूटेशन को अप्रूवल दिलाया गया।
इसी दौरान नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने बिना जांच के विवादित जमीनों पर नक्शे पास कर दिए।
अब जांच सिर्फ CO तक सीमित नहीं रहेगी—बल्कि यह LRDC और नगर निगम के बड़े अधिकारियों तक पहुंचेगी।
जनता के साथ अन्याय: ‘सिस्टम’ चला बुलडोजर
इस घोटाले की सबसे दर्दनाक तस्वीर आम जनता की है।
कई लोग कहते हैं —
“रजिस्ट्री सरकारी थी, रसीद सरकारी थी, म्यूटेशन सरकारी था — फिर घर अवैध कैसे हो गया?”
जनता अब सवाल पूछ रही है कि जब सिस्टम ने ही उन्हें वैधता का भरोसा दिया, तो बुलडोजर उन अधिकारियों के घरों पर क्यों नहीं चलता, जिन्होंने फाइलों पर साइन किए?
ACB जांच और संपत्ति जब्ती की तैयारी
हाईकोर्ट ने इस मामले में ACB जांच के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि बेघर हुए लोगों के मुआवजे का भुगतान सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि दोषी अधिकारियों की संपत्ति कुर्क कर किया जाए।
इस आदेश से ‘सफेदपोशों’ की नींद उड़ी हुई है।
बड़ा सवाल:
क्या सिर्फ एक CO की हैसियत थी कि वह करोड़ों की जमीन निजी हाथों में सौंप दे सके?
या फिर इस घोटाले के पीछे किसी ‘ऊपर बैठे आका’ का आशीर्वाद भी था?
अब
रांची के विकास के नाम पर ‘विनाश का खेल’ खेलने वाले अफसरों का चेहरा अब बेनकाब होने वाला है। देखना यह है कि जांच की जद में सिर्फ छोटे मोहरे आते हैं या फिर बड़े मगरमच्छों पर भी शिकंजा कसता है, जिन्होंने सत्ता की हनक में कानून को कुचला।
कोई टिप्पणी नहीं: