राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में बोले— मातृभाषा आधारित शिक्षा ही गुणवत्तापूर्ण सीखने का सबसे सशक्त माध्यम
राँची। होटल चाणक्या बी.एन.आर., राँची में आयोजित बहुभाषी शिक्षा पर राष्ट्रीय कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए झारखण्ड सरकार के माननीय उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि झारखण्ड भाषायी विविधता का अद्भुत और जीवंत उदाहरण है। “कोस-कोस पर पानी बदले, दस कोस पर वाणी” की कहावत का वास्तविक अर्थ यदि कहीं देखने को मिलता है, तो वह झारखण्ड में मिलता है। यहाँ पाँच प्रमुख जनजातीय और चार क्षेत्रीय भाषाएँ बोली जाती हैं, इसलिए 24 जिलों को किसी एक भाषा के दायरे में बांधना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि बहुभाषी शिक्षा केवल नीति या प्रयोग नहीं, बल्कि झारखण्ड की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक समावेशिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला है। मातृभाषा में शिक्षा से न केवल सीखना सहज होता है, बल्कि बच्चे का भावनात्मक, मानसिक और बौद्धिक विकास भी तीव्र होता है।
मातृभाषा ही बच्चे की पहली पाठशाला
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि माँ ही बच्चे की पहली शिक्षिका होती है, इसलिए ‘मदर टंग’ की अवधारणा शिक्षा की जड़ में निहित है। यदि प्रारंभिक शिक्षा सरल, रोचक और व्यवहारिक नहीं होगी, तो वह केवल ब्लैकबोर्ड और पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रह जाएगी और जागरूक नागरिक निर्माण का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाएँ लुप्त होने के कगार पर हैं। भाषा का लुप्त होना केवल शब्दों का खोना नहीं है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और पीढ़ियों की स्मृति का मिटना है। इसलिए बच्चों को उनकी अपनी भाषा में शिक्षा देना इन भाषाओं के संरक्षण का पहला और सबसे प्रभावी कदम है। खोरठा भाषा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मातृभाषा के माध्यम से ही भाषाओं की विशिष्ट ध्वनियाँ, लय और पहचान संरक्षित रह सकती हैं।
पलाश परियोजना का विस्तार आवश्यक
श्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि वर्तमान में पलाश परियोजना राज्य के केवल 8 जिलों में संचालित हो रही है। इसे शेष 16 जिलों तक शीघ्र विस्तार देने की आवश्यकता है, ताकि बहुभाषी शिक्षा का लाभ पूरे राज्य के विद्यार्थियों तक पहुँच सके।
उन्होंने विभागीय सचिव तथा माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया और कुरमाली जैसी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था में सशक्त रूप से शामिल किया जाए और इनके लिए पाठ्य-सामग्री, प्रशिक्षित शिक्षक तथा संसाधन उपलब्ध कराए जाएँ।
योगदानकर्ताओं को सम्मान — अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा
कार्यक्रम में बहुभाषी शैक्षणिक सामग्री के निर्माण में योगदान देने वाली छात्राओं और शिक्षकों को सम्मानित किया गया। मंत्री ने कहा कि राज्य स्तर पर दिया गया यह सम्मान अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा और बहुभाषी शिक्षा के क्षेत्र में नए नवाचारों को बढ़ावा देगा।
कॉन्क्लेव से मिले अनुभव देंगे नई दिशा
देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए माननीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि दो दिवसीय यह राष्ट्रीय कॉन्क्लेव बहुभाषी शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच, नए प्रयोग और नई नीतियों को जन्म देगा तथा झारखण्ड की स्कूली शिक्षा को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
इस अवसर पर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि, अकादमिक विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान बहुभाषी शिक्षा पर प्रस्तुतियाँ, अनुभव साझा सत्र और विषयगत तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए।
Reviewed by PSA Live News
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12:14:00 pm
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