राँची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र, चौधरी बगान, हरमू रोड, राँची में सरस्वती पूजा का पर्व अत्यंत श्रद्धा, आध्यात्मिक वातावरण और ज्ञानपूर्ण संदेशों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर केन्द्र की संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने माँ सरस्वती के आध्यात्मिक स्वरूप और उनके दिव्य कर्तव्य पर गहन प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जैसे राष्ट्र को आज़ादी दिलाने के महान कार्य के कारण महात्मा गांधी को लोगों ने ‘राष्ट्रपिता’ की उपाधि दी, उसी प्रकार ज्ञान सागर परमात्मा के दिव्य ज्ञान को पूर्ण रूप से बुद्धि रूपी गागर में धारण करने के कारण माँ सरस्वती को स्वयं परमात्मा द्वारा ‘ज्ञान की देवी’ का खिताब मिला। उन्होंने कहा कि सरस्वती द्वारा दिया जाने वाला ज्ञान भी एक निश्चित काल में ही प्रकट होता है।
राजयोगिनी निर्मला बहन ने बताया कि जब संसार की नैतिक और आध्यात्मिक स्थिति इतनी गिर जाती है कि उसे साधारण पुरुष या महापुरुष भी संभाल नहीं पाते, तब स्वयं परमपुरुष परमात्मा को हस्तक्षेप करना पड़ता है। उस समय परमात्मा सहज ज्ञान और सहज राजयोग की शक्ति के माध्यम से मानव आत्माओं को जागृत करते हैं, और उसी दिव्य प्रकाश को माँ सरस्वती चारों दिशाओं में फैलाती हैं। वर्तमान समय को उन्होंने ‘संगमयुग’ बताते हुए कहा कि यही वह काल है जब सरस्वती का दिव्य कर्तव्य गुप्त रूप से चल रहा है।
उन्होंने माँ सरस्वती के स्वरूप का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए कहा कि उनके हाथ में दिखाई गई वीणा (सितार) ईश्वरीय ज्ञान का प्रतीक है, सफेद वस्त्र पवित्रता और शुद्धता के प्रतीक हैं, पुस्तक सभी के भाग्य निर्माता बनने का संकेत देती है, माला निरंतर ईश्वरीय स्मृति का प्रतीक है, हंस-वाहन नीर-क्षीर विवेक का प्रतीक है तथा उनके आभूषण विभिन्न दिव्य गुणों को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि सरस्वती पवित्रता की भी देवी हैं, क्योंकि यदि ज्ञान शेरनी का दूध है तो उसे धारण करने के लिए बुद्धि रूपी पात्र भी सोने का होना चाहिए। इसी कारण प्राचीन काल से विद्यार्थी ब्रह्मचर्य में रहकर विद्या का अध्ययन करते आए हैं। माँ सरस्वती स्वयं आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए एकव्रता और एकनामी के दृढ़ संकल्प के साथ ज्ञानदान करती रहीं।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने ध्यान, राजयोग अभ्यास और सरस्वती वंदना के माध्यम से आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया। केन्द्र परिसर में पूरे वातावरण में शांति, पवित्रता और दिव्यता की अनुभूति बनी रही।
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3:01:00 pm
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