रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि मकर संक्रांति भारत के प्रमुख और प्राचीन पर्वों में से एक है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है कई स्थानों में 15 जनवरी को भी यह पर्व मनाया जाएगा।मकर संक्रांति का विशेष महत्व इस बात में निहित है कि यह एक खगोलीय घटना पर आधारित पर्व है,न कि केवल धार्मिक तिथि पर। इसी कारण यह लगभग हर वर्ष एक ही दिन मनाया जाता है, जबकि अन्य भारतीय पर्व तिथियों के अनुसार बदलते रहते हैं।मकर संक्रांति उस दिन मनाई जाती है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। इस दिन से सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर हो जाती है, जिसे उत्तरायण कहते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायण को रात्रि माना गया है। इसलिए यह समय अत्यंत शुभ, सकारात्मक और कल्याणकारी माना गया है।हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन किया गया दान, स्नान, जप और तप अक्षय फल देता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत कर उन्हें मंदार पर्वत के नीचे दबा दिया था। महाभारत के अनुसार पितामह भीष्म ने उत्तरायण की प्रतीक्षा कर इसी दिन देह त्याग किया, जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। गंगा सागर में स्नान का भी विशेष महत्व है।मकर संक्रांति केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक भी है। भारत के विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है-उत्तर भारत में मकर संक्रांति,पंजाब में लोहड़ी तमिलनाडु में पोंगल,असम में भोगाली बिहू,गुजरात और राजस्थान में पतंगोत्सव हर क्षेत्र में परंपराएँ अलग हैं, पर भाव एक ही है-उत्सव, उल्लास और नई शुरुआत।मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन खाने और दान करने की परंपरा है। तिल शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और गुड़ मिठास व गर्मी देता है। प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश देता है कि कटु वचन छोड़कर जीवन में मधुरता अपनानी चाहिए। मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाना केवल एक परंपरा नहीं बल्कि आस्था, ज्योतिष और सामाजिक चेतना का सुंदर संगम है यह पर्व सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और जीवन में नई ऊर्जा के स्वागत करने का संदेश देता है। यह पर्व कृषि प्रधान भारत में फसल कटाई के समय आता है। किसान अपनी मेहनत की पहली उपज प्रकृति और ईश्वर को अर्पित कर कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह पर्व मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य का सुंदर उदाहरण है।मकर संक्रांति केवल एक तिथि या उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, सकारात्मक सोच और सामाजिक एकता का पर्व है। यह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर और आलस्य से कर्म की ओर प्रेरित करता है। बदलते समय में भी मकर संक्रांति हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर जीवन में संतुलन और सौहार्द बनाए रखने का संदेश देती है।
मकर संक्रांति आत्मिक शुद्धि, प्रकृति,परंपरा और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व: संजय सर्राफ
Reviewed by PSA Live News
on
10:55:00 pm
Rating:
Reviewed by PSA Live News
on
10:55:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: