रांची नगर निगम की स्थापना 1979 में तत्कालीन बिहार में हुई थी, जो पूरे रांची शहर के नागरिक प्रशासन के लिए जिम्मेदार है । वर्तमान में यह झारखंड की सबसे बड़ी नगर निकाय है।
इस बार 2026 के नगर पालिका चुनाव में रांची नगर निगम में मेयर पद के लिए कुल 19 उम्मीदवारों का नामांकन स्वीकृति हुआ था, जिसमें 8 उम्मीदवारों द्वारा नाम वापसी के बाद कुल 11 उम्मीदवार मैदान में अभी भी डटे हुए है।
वैसे तो यह चुनाव कहने के लिए गैर दलीय आधार पर ही होता है, पर राजनीतिक दल इसे राजनीतिक बना ही देता है और चुनाव पर इसका पूरा असर भी होता है।
विपक्षी भाजपा और गैर भाजपा यानी झामुमो, कांग्रेस, राजद और अन्य वाम दल दोनों अपने चहेते को रांची का मेयर बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं।
इससे पूर्व के दो चुनावों में भाजपा लगातार मेयर और डिप्टी मेयर दोनों ही पदों पर अपनी जीत हासिल करती रही है। परंतु इस बार आशा लकड़ा का केंद्रीय अनुसूचित जाति बोर्ड का सदस्य बन जाने के बाद समीकरण कुछ अलग हो सकता है।
इस बार डिप्टी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया में भी पूरी तरह से बदलाव कर दिया गया है। पहले मेयर की तरह डिप्टी मेयर का चुनाव भी जनता के द्वारा प्रत्यक्ष किया जाता था। पर अब डिप्टी मेयर का चुनाव नव निर्वाचित पार्षदों के द्वारा किया जाएगा और उम्मीदवार भी उन नव निर्वाचित पार्षदों में से ही कोई हो पाएगा। इसलिए इसकी प्रक्रिया इस चुनाव के बाद में होगी। अभी जनता द्वारा वार्ड पार्षद और मेयर का प्रत्यक्ष चुनाव किया जाएगा।
इस बार मेयर पद के लिए भाजपा ने रोशनी खलखो को अपना समर्थन दे दिया है और उसके लिए प्रचार अभियान की शुरुआत भी हो चुकी है। जबकि गैर भाजपा दलों ने रमा खलखो को अपना उम्मीदवार बनाया है।
अब एक नजर जानते है कि कौन है यह रोशनी खलखो और कौन है रमा खलखो?
रौशनी खलखो अभी भी रांची नगर निगम में निवर्तमान पार्हैषद है और भाजपा अनुसूचित जन जाति मोर्चा का प्रदेश सचिव भी है। साथ ही रांची नगर निगम का मेयर, डिप्टी मेयर और वार्ड पार्षद का कार्यकाल 2023 को पूरा हो जाने के बाद सरकार और चुनाव आयोग की जिद के कारण जब यह चुनाव ही रुक गया था, तब यही रोशनी खलखो ने उच्च न्यायालय में लम्बी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया और सरकार और चुनाव आयोग दोनों के अधिकारियों को संदेह न्यायालय में उपस्थित होकर चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए बाध्य होना पड़ा था। तब जाकर आज यह चुनाव हो पा रहा है और शहर की जनता को लगभग 3 साल विलंब से अपने मताधिकार का उपयोग करने का मौका मिल पाया है। इसके अलावा भी यह हमेशा आम लोगों के मुद्दे को मजबूती से उठाती रही है।
दूसरा उम्मीदवार रमा खलखो को कांग्रेस और झामुमो का समर्थन प्राप्त है। यह पूर्व में 2013 से पहले रांची की मेयर भी रह चुकी है। 2013 में इसे भाजपा समर्थित आशा लकड़ा ने पराजित कर दिया था जो इससे पूर्व में 2018 में हुए चुनाव तक अपनी कब्जा लगातार बरकरार रखी थी। पर इस बार आशा लकड़ा के इस चुनावी मैदान में नहीं होने के कारण इस बार का समीकरण के बारे में कुछ कह पाना मुश्किल हो रहा है।
बांकी के 9 उम्मीदवार कोई भी चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं हो सकते हैं पर अपने अपने हिसाब से अलग अलग क्षेत्रों से वोटों का विभाजन जरूर करेंगे यह तय है। और सभी उम्मीदवार आरक्षित पद होने के कारण अनुसूचित जन जाति के ही है और छोटे या बड़े सबका अपना कुछ न कुछ प्रभाव भी होगा, जो किसी भी उम्मीदवार को हराने या जिताने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
अब किसके भाग्य में मिलेगी इस बार रांची के मेयर की यह कुर्सी यह तो 23 फरवरी को मतदान और फिर 27 फरवरी को मतगणना का कार्य पूर्ण होने के बाद ही पता चल पायेगा। पर इतना तो तय है कि इस बार का यह चुनाव अपने आप में बहुत ही दिलचस्प होगा ।
इधर वार्ड पार्षद के पद के लिए कई वार्डों में कई करीबी दोस्त आपस में भीड़ चुके हैं, जिसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि वार्ड पार्षद का चुनाव निर्वाचित होने के बाद डिप्टी मेयर के पद तक जाने का रास्ता बन पाएगा, जो दूसरी सीढी होगी, पर अभी की स्थिति को देखते हुए पहली सीढ़ी को पार कर पाना भी उतना आसान नहीं रह गया है जितना इससे पूर्व के चुनाव में हुआ करता था ।
आगे जनता का क्या फैसला होगा उसका सभी को इंतजार है।
Reviewed by PSA Live News
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11:35:00 pm
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