दुमका, संवाददाता। झारखंड की राजनीति से जुड़े करीब 16 वर्ष पुराने सड़क जाम मामले में दुमका स्थित एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने पोड़ैयाहाट से कांग्रेस विधायक
प्रदीप यादव को दोषी करार देते हुए
भादवि की धारा 225 के तहत एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
हालांकि सजा के तुरंत बाद ही अदालत ने उन्हें राहत देते हुए सशर्त जमानत प्रदान कर दी। वहीं, साक्ष्य के अभाव में पूर्व भाजपा विधायक रणधीर सिंह समेत अन्य सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
विशेष अदालत में सुनवाई, सभी आरोपी रहे मौजूद
यह फैसला विशेष न्यायाधीश सह एसडीजेएम मोहित चौधरी की अदालत में सुनाया गया। सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े सभी आरोपी अदालत में उपस्थित रहे।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर प्रदीप यादव के खिलाफ आरोप को सिद्ध माना, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
सजा के बाद तुरंत मिली जमानत
सजा सुनाए जाने के बाद बचाव पक्ष ने तुरंत प्रोविजनल बेल के लिए आवेदन दाखिल किया। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए विधायक को
10-10 हजार रुपये के दो मुचलकों पर एक माह के लिए जमानत दे दी।
इस फैसले के चलते सजा के बावजूद उन्हें तत्काल जेल नहीं जाना पड़ा।
क्या है मामला
यह मामला करीब 16 वर्ष पूर्व हुए एक सड़क जाम से जुड़ा है, जिसमें आरोप था कि आंदोलन के दौरान सड़क बाधित कर प्रशासनिक कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया गया था। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब इस मामले में अदालत का फैसला सामने आया है।
छह गवाहों की गवाही पर आधारित फैसला
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में अब तक छह गवाहों की गवाही कराई गई थी। अदालत ने इन्हीं गवाहियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय सुनाया।
जहां प्रदीप यादव के खिलाफ आरोप साबित हुए, वहीं अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
राजनीतिक हलचल तेज
इस फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक को सजा और तत्काल जमानत मिलने के बाद विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया भी सामने आने की संभावना है। वहीं, कानूनी जानकारों का कहना है कि इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।
कुल मिलाकर, 16 साल पुराने इस मामले में आया यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया के लंबे दौर के बाद सामने आया है, जिसका राजनीतिक और कानूनी—दोनों स्तरों पर प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
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