“विकास की कीमत पर हरियाली नहीं”: हरमू चौक पर 25 पेड़ों की कटाई पर पूर्व पार्षद अरुण कुमार झा ने जताई चिंता
राँची। राजधानी राँची के व्यस्ततम इलाकों में शामिल हरमू चौक पर विकास कार्यों के नाम पर लगभग 25 पेड़ों की कटाई को लेकर सामाजिक चिंता गहराने लगी है। इस मुद्दे पर पूर्व पार्षद अरुण कुमार झा ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। यदि शहरों में लगातार पेड़ों की कटाई होती रही, तो आने वाले समय में प्रदूषण और जलवायु संकट भयावह रूप ले सकता है।
पूर्व पार्षद श्री झा ने कहा कि हरमू चौक जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में पहले से ही वाहनों का दबाव, धूल, धुआँ और शोर प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई शहर के पर्यावरणीय संतुलन को और कमजोर करेगी। उन्होंने कहा कि पेड़ केवल हरियाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे शहर को स्वच्छ हवा, ठंडा वातावरण और जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की आवश्यकता से कोई इंकार नहीं कर सकता, लेकिन विकास का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि शहर की हरियाली ही समाप्त कर दी जाए। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि किसी भी सड़क चौड़ीकरण, फ्लाईओवर या अन्य निर्माण कार्यों से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का गंभीरता से अध्ययन किया जाए तथा जितने पेड़ काटे जाएं, उससे कई गुना अधिक पेड़ लगाने की बाध्यता सुनिश्चित की जाए।
अरुण कुमार झा ने शहरवासियों से भी अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। यदि आज लोग चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियों को प्रदूषण, भीषण गर्मी और जल संकट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राँची कभी अपनी हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के लिए पहचान रखता था, लेकिन अनियोजित शहरीकरण और लगातार पेड़ों की कटाई ने इस पहचान को खतरे में डाल दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि शहर में बढ़ती जनसंख्या और वाहनों की संख्या के कारण वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में पेड़ों को बचाना और नए पौधे लगाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि हरमू चौक क्षेत्र में काटे गए पेड़ों के बदले व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए और उसकी निगरानी भी सुनिश्चित की जाए, ताकि केवल औपचारिकता के तौर पर पौधारोपण न हो।
पूर्व पार्षद ने कहा कि यदि विकास योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो राँची जैसे शहर भी भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट की चपेट में आ सकते हैं। उन्होंने नागरिक संगठनों, युवाओं और सामाजिक संस्थाओं से आगे आकर हरियाली बचाने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
Reviewed by PSA Live News
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9:24:00 pm
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