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मंईयां योजना में बड़ा सत्यापन अभियान शुरू

हजारों महिलाओं की रुकी किस्तों पर सरकार की नजर, फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद ही खातों में आएगी राशि

अपात्र, मृत और डुप्लीकेट लाभार्थियों की होगी पहचान, पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर तक प्रशासन अलर्ट


रांची।
झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना अब व्यापक जांच और सत्यापन के दौर से गुजर रही है। राज्यभर में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाओं के आवेदन और भुगतान होल्ड पर रख दिए गए हैं, जिनकी पात्रता, दस्तावेज या पहचान को लेकर संदेह की स्थिति सामने आई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) के किसी भी रुकी हुई किस्त का भुगतान नहीं किया जाएगा।

सरकार के निर्देश के बाद पंचायत स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक सक्रिय हो गया है। कई जिलों में सत्यापन अभियान शुरू कर दिया गया है, जहां लाभार्थियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने दस्तावेजों की जांच करानी होगी। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन में सही पाए जाने के बाद ही लाभार्थियों की रुकी हुई राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।


सरकार क्यों चला रही है सत्यापन अभियान?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में योजना से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच में पता चला कि कुछ मामलों में:

  • मृत महिलाओं के नाम पर भुगतान हो रहा था,
  • एक ही महिला के नाम से कई आवेदन दर्ज थे,
  • अपात्र महिलाओं ने योजना का लाभ ले लिया था,
  • आधार और बैंक खाते में गड़बड़ी थी,
  • कुछ आवेदनों में गलत दस्तावेज लगाए गए थे।

इन्हीं शिकायतों के बाद सरकार ने योजना की पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक लाभ पहुंचाने के लिए व्यापक भौतिक सत्यापन का निर्णय लिया है।


पंचायत भवन और आंगनबाड़ी केंद्रों पर लग रही भीड़

राज्य के कई जिलों में पंचायत भवन, प्रखंड कार्यालय और आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाभार्थियों की भीड़ देखी जा रही है। प्रशासन की ओर से महिलाओं को निर्धारित तिथि पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को कहा गया है।

सत्यापन के दौरान लाभार्थियों की पहचान, आधार विवरण, बैंक खाते की स्थिति और पात्रता की जांच की जा रही है। कई स्थानों पर पंचायत सचिव, जनसेवक, आंगनबाड़ी सेविका और ब्लॉक स्तर के अधिकारी संयुक्त रूप से प्रक्रिया पूरी करा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं सुबह से ही दस्तावेज लेकर केंद्रों पर पहुंच रही हैं, ताकि उनकी रुकी हुई राशि जल्द जारी हो सके।


कौन-कौन से दस्तावेज साथ ले जाना जरूरी?

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन के दौरान लाभार्थियों को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य होगा। इनमें शामिल हैं:

  • आधार कार्ड
  • राशन कार्ड
  • बैंक पासबुक
  • आधार से लिंक मोबाइल नंबर
  • पहचान संबंधी अन्य आवश्यक दस्तावेज

अधिकारियों ने यह भी कहा है कि बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए, अन्यथा भुगतान में तकनीकी बाधा आ सकती है।


सत्यापन नहीं कराने वालों पर हो सकती है कार्रवाई

सरकार ने संकेत दिए हैं कि निर्धारित समय के भीतर सत्यापन नहीं कराने वाले लाभार्थियों का आवेदन रद्द किया जा सकता है। ऐसे मामलों में भविष्य की किस्तें भी बंद की जा सकती हैं।

प्रशासन का कहना है कि कई बार लाभार्थी दस्तावेज अपडेट नहीं कराते, जिससे भुगतान प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसलिए सभी महिलाओं से समय पर सत्यापन कराने की अपील की गई है।


पात्र महिलाओं को एक साथ मिलेगी रुकी हुई राशि

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जो महिलाएं जांच में पात्र पाई जाएंगी, उन्हें उनकी रुकी हुई किस्तें एक साथ जारी की जाएंगी। भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा।

इस घोषणा के बाद उन महिलाओं में राहत की उम्मीद बढ़ गई है जिनकी कई महीनों की राशि लंबित है।


गांव-गांव चल रहा प्रशासनिक अभियान

राज्य सरकार ने सभी जिलों के उपायुक्तों और प्रखंड अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सत्यापन अभियान को गंभीरता से चलाया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी वास्तविक पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।

ग्रामीण क्षेत्रों में माइकिंग, सूचना पत्र और पंचायत स्तर पर बैठकों के माध्यम से महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि योजना में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।


महिलाओं के आर्थिक सहारे की बड़ी योजना

मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना झारखंड सरकार की प्रमुख महिला कल्याण योजनाओं में शामिल है। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे वे घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।

सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को मजबूत आर्थिक आधार देना है, लेकिन इसके लिए लाभार्थियों का वास्तविक और पात्र होना भी उतना ही जरूरी है।


अफवाहों से बचने की अपील

प्रशासन ने महिलाओं से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या बिचौलियों के झांसे में न आएं। सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह सरकारी निगरानी में की जा रही है और इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

यदि कोई व्यक्ति सत्यापन या भुगतान के नाम पर पैसे मांगता है, तो इसकी शिकायत तुरंत संबंधित प्रखंड कार्यालय या जिला प्रशासन से करने को कहा गया है।

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