मधुबनी डीएम के आदेश को भी नहीं मान रहे अधिकारी, नहीं हटा अतिक्रमण, बाबूबरही प्रशासन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
जनता दरबार से सोशल मीडिया शिकायत तक, हर निर्देश बेअसर; पीड़ित ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार
मधुबनी: जिले के बाबूबरही अंचल अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनमती में चल रहे अतिक्रमण विवाद ने अब प्रशासनिक कार्यशैली और सरकारी आदेशों के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अतिक्रमण वाद संख्या-06/2020-21 में जिला पदाधिकारी स्तर से स्पष्ट निर्देश जारी होने के बावजूद महीनों बाद भी जमीन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सका है। इस मामले को लेकर पीड़ित पक्ष और स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने जिला पदाधिकारी मधुबनी से पुनः हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि यदि डीएम के आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे। ग्रामीणों का आरोप है कि बाबूबरही अंचल कार्यालय की लापरवाही और अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण वर्षों पुराना विवाद आज भी जस का तस बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत सोनमती की विवादित भूमि को लेकर अंचल कार्यालय बाबूबरही में अतिक्रमण वाद संख्या-06/2020-21 दर्ज है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस मामले में लगातार आवेदन, शिकायत और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
जनता दरबार में डीएम ने दिया था सात दिन में कार्रवाई का निर्देश
बताया गया है कि 6 फरवरी 2026 को आयोजित जनता दरबार में यह मामला जिला पदाधिकारी के समक्ष उठाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने तत्काल राजस्व अधिकारी, बाबूबरही को सात दिनों के भीतर संबंधित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का स्पष्ट निर्देश दिया था। जनता दरबार में दिए गए इस आदेश से पीड़ित पक्ष को उम्मीद जगी थी कि वर्षों से लंबित समस्या का समाधान अब जल्द हो जाएगा।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी न तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई और न ही प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की ठोस पहल दिखाई दी। इससे पीड़ित परिवार की उम्मीदें एक बार फिर टूट गईं।
सोशल मीडिया शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि जब जनता दरबार के आदेश का पालन नहीं हुआ, तब उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंचाई। इसके बाद 28 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन द्वारा राजस्व अधिकारी बाबूबरही को मामले से संबंधित विवरणी भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
हालांकि, इस आदेश के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने न तो स्थल निरीक्षण की गंभीर पहल की और न ही अतिक्रमण हटाने को लेकर कोई प्रभावी अभियान चलाया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर प्रशासनिक आदेशों का पालन क्यों नहीं हो रहा है।
“आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित” — ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी आदेश केवल फाइलों और कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं। लोगों का आरोप है कि यदि जिला पदाधिकारी के स्पष्ट निर्देश के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो यह प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही दोनों पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
ग्रामीणों ने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही से आम लोगों का प्रशासन पर से विश्वास उठता जा रहा है। कई लोगों ने आशंका जताई कि कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के दबाव या मिलीभगत के कारण कार्रवाई लंबित रखी जा रही है।
वर्षों से लंबित है मामला
अतिक्रमण वाद संख्या-06/2020-21 यह दर्शाता है कि मामला पिछले कई वर्षों से लंबित है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा करते-करते वे मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से परेशान हो चुके हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण विवाद और अधिक जटिल होता जा रहा है।
डीएम से स्वयं संज्ञान लेने की मांग
पीड़ित पक्ष ने जिला पदाधिकारी मधुबनी से मांग की है कि वे स्वयं इस पूरे मामले का संज्ञान लें और संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब करें। साथ ही जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं होती है, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से बड़े स्तर पर आंदोलन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष शिकायत करने को मजबूर होंगे। फिलहाल पूरे इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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