मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी मंजूरी, लंबे समय से अटके घाट जल्द होंगे चालू
रांची : झारखंड में लंबे समय से जारी बालू संकट को खत्म करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Hemant Soren ने बालू घाटों की बंदोबस्ती एवं खनन लीज प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब राज्य के संबंधित जिलों के उपायुक्त (DC) अपने-अपने जिले में बालू घाटों की खनन लीज को निष्पादित एवं स्वीकृत कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद खान एवं भूतत्व विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार के इस फैसले को बालू आपूर्ति व्यवस्था सुधारने और अवैध खनन पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अटके बालू घाटों को मिलेगा रास्ता
राज्य में कई बालू घाट लंबे समय से लीज डीड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण बंद पड़े थे। इससे निर्माण कार्यों पर व्यापक असर पड़ रहा था। सरकारी योजनाओं, निजी निर्माण, सड़क, पुल और आवास परियोजनाओं में बालू की कमी के कारण लागत बढ़ रही थी।
अब DC स्तर पर अधिकार मिलने से लीज प्रक्रिया में तेजी आएगी और अटके हुए घाट जल्द शुरू हो सकेंगे। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने से प्रक्रियागत देरी कम होगी और बालू घाटों का संचालन अधिक पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।
निर्माण कार्यों को मिलेगी गति
राज्य में पिछले कई महीनों से बालू की कमी के कारण आम लोगों के साथ-साथ निर्माण एजेंसियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कीमतों में भी संतुलन आने की संभावना है। वर्तमान में कई जिलों में बालू ऊंचे दामों पर बिक रही है, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अवैध खनन पर लगेगी रोक
सरकार का कहना है कि वैध घाटों के संचालन में तेजी आने से अवैध बालू खनन और तस्करी पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। अब तक वैध घाट बंद रहने का फायदा उठाकर अवैध कारोबारी सक्रिय हो जाते थे, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता था।
नई व्यवस्था के तहत जिला प्रशासन सीधे निगरानी करेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर जवाबदेही भी तय होगी। खान विभाग को उम्मीद है कि इससे राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी और बालू कारोबार अधिक व्यवस्थित होगा।
जिलों को जारी हुआ आदेश
खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब संबंधित उपायुक्त बालू घाटों की लीज प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान करेंगे। विभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया है कि लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जिन जिलों में बालू घाट तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से लंबित हैं, वहां जल्द समीक्षा कर संचालन शुरू कराया जाएगा।
जनता और कारोबारियों में उम्मीद
सरकार के इस निर्णय के बाद निर्माण व्यवसाय से जुड़े लोगों, ट्रांसपोर्टरों और आम उपभोक्ताओं में राहत की उम्मीद जगी है। लोगों का कहना है कि यदि घाट समय पर चालू हो जाते हैं तो बाजार में कृत्रिम संकट समाप्त होगा और निर्माण गतिविधियां सामान्य हो सकेंगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस फैसले को व्यावहारिक और समयानुकूल कदम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से बालू संकट राज्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।
Reviewed by PSA Live News
on
6:46:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: