45 हजार लंबित इ-मापी मामलों के निपटारे को सरकार का बड़ा फैसला, जरूरत वाले अंचलों में भेजे जाएंगे अमीन
जमीन मापी की प्रक्रिया होगी तेज, आउटसोर्सिंग से भी लिए जाएंगे प्रशिक्षित अमीनों की सेवाएं
पटना। बिहार में जमीन मापी से जुड़े हजारों लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्यभर में लंबित इ-मापी (ऑनलाइन भूमि मापन) मामलों को तेजी से निपटाने के लिए अमीनों की तैनाती में व्यापक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत जिन अंचलों में इ-मापी के आवेदन कम हैं और अमीनों पर कार्यभार अपेक्षाकृत कम है, वहां से उन्हें डेपुटेशन पर उन अंचलों में भेजा जाएगा जहां बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।
विभागीय समीक्षा में यह तथ्य सामने आया है कि बिहार में वर्तमान समय में लगभग 45 हजार इ-मापी मामले लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है जिनका निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन नहीं हो पाया है। कई जिलों में आवेदकों को अपनी जमीन की मापी के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे जमीन संबंधी विवाद बढ़ने के साथ-साथ राजस्व प्रशासन पर भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
मानव संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का मानना है कि वर्तमान में कुछ अंचलों में इ-मापी आवेदनों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, जबकि कई अंचलों में मामलों का भारी दबाव है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए विभाग अब उपलब्ध अमीनों का पुनर्विन्यास करेगा। जिन क्षेत्रों में कार्यभार कम है, वहां से अमीनों को अस्थायी रूप से उन स्थानों पर भेजा जाएगा जहां लंबित मामलों की संख्या अधिक है।
अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से बिना अतिरिक्त समय गंवाए लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और आम लोगों को जमीन मापी के लिए लंबे इंतजार से राहत मिलेगी।
मंत्री ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में लंबित मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि इ-मापी से संबंधित सभी लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाई जाए तथा आम नागरिकों को समयबद्ध तरीके से राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
मंत्री ने कहा कि भूमि मापन से जुड़े मामलों में अनावश्यक विलंब के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, बंटवारा और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाएं भी प्रभावित होती हैं। इसलिए लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना आवश्यक है।
आउटसोर्सिंग से नियुक्त होंगे प्रशिक्षित अमीन
लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए विभाग ने अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। जानकारी के अनुसार, आउटसोर्सिंग के माध्यम से प्रशिक्षित अमीनों की सेवाएं लेने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इससे मौजूदा अमीनों पर कार्यभार कम होगा और इ-मापी मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी।
विभाग का मानना है कि प्रशिक्षित अमीनों की उपलब्धता बढ़ने से न केवल लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि नए आवेदनों का भी समय पर निष्पादन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
लगातार बढ़ रहे हैं ऑनलाइन आवेदन
पिछले कुछ वर्षों में बिहार में भूमि संबंधी सेवाओं के डिजिटलीकरण के बाद इ-मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। लोगों को घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, बढ़ते आवेदनों के अनुपात में अमीनों की संख्या पर्याप्त नहीं होने के कारण कई जिलों में लंबित मामलों का अंबार लग गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि मापन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने से जमीन विवाद, खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री, बंटवारा और दाखिल-खारिज जैसे मामलों में भी देरी होती है। ऐसे में सरकार की नई पहल आम नागरिकों के लिए काफी राहतकारी साबित हो सकती है।
भूमि विवादों में भी आएगी कमी
राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय पर भूमि मापन होने से सीमांकन संबंधी विवादों में कमी आएगी। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां भूमि की सही मापी नहीं होने के कारण पड़ोसी भूमि मालिकों के बीच विवाद उत्पन्न हो जाते हैं। इ-मापी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाकर ऐसे विवादों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
सरकार को उम्मीद है कि अमीनों की तैनाती में संतुलन स्थापित करने, अतिरिक्त प्रशिक्षित अमीनों की सेवाएं लेने और लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग से इ-मापी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनेगी। यदि यह योजना सफल होती है तो राज्य के हजारों आवेदकों को राहत मिलेगी और भूमि प्रबंधन व्यवस्था में पारदर्शिता तथा दक्षता भी बढ़ेगी।
भूमि मापी से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन की दिशा में उठाया गया यह कदम बिहार के राजस्व प्रशासन को अधिक जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
Reviewed by PSA Live News
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10:39:00 pm
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