सूचना के अधिकार व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती, लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे की बढ़ी उम्मीद
रांची, 10 जून 2026। झारखंड सरकार ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सूचना आयोग में चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राज्यपाल द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15(3) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चार व्यक्तियों को झारखंड राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है।
जारी अधिसूचना के अनुसार अनुज कुमार सिन्हा, तरुण खत्री, अमूल्य नीरज खलखो तथा शिवपूजन पाठक को झारखंड राज्य सूचना आयोग का सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के साथ ही राज्य सूचना आयोग में लंबे समय से चली आ रही रिक्तियों को भरने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। माना जा रहा है कि इससे आयोग की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी तथा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 को लोकतंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही का एक सशक्त माध्यम माना जाता है। इस कानून के माध्यम से आम नागरिक सरकारी विभागों, संस्थानों और निकायों से सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं। जब किसी नागरिक को निर्धारित समय सीमा में सूचना नहीं मिलती अथवा संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होता, तब वह राज्य सूचना आयोग में अपील कर सकता है। ऐसे में आयोग की सक्रियता और दक्षता सीधे तौर पर नागरिकों के सूचना के अधिकार से जुड़ी होती है।
पिछले कुछ वर्षों से झारखंड राज्य सूचना आयोग में लंबित मामलों की संख्या को लेकर लगातार चिंता व्यक्त की जाती रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, आरटीआई कार्यकर्ताओं तथा पारदर्शिता के पक्षधर समूहों का कहना रहा है कि आयोग में रिक्त पदों के कारण मामलों के निपटारे में अनावश्यक विलंब हो रहा था। कई मामलों में सुनवाई की तारीख मिलने में महीनों और कभी-कभी वर्षों तक का समय लग जाता था। ऐसे में नई नियुक्तियों को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूचना आयोग केवल एक अपीलीय संस्था नहीं बल्कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला एक महत्वपूर्ण संवैधानिक तंत्र है। आयोग के प्रभावी संचालन से सरकारी विभागों में जवाबदेही बढ़ती है, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में सहायता मिलती है तथा आम नागरिकों का शासन व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है। यही कारण है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि सुशासन की दिशा में एक आवश्यक कदम माना जाता है।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 16(3) के अनुसार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति उनके शपथ ग्रहण की तिथि से प्रभावी होगी। उनका कार्यकाल तीन वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक रहेगा। यह प्रावधान आयोग में अनुभव और नई ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इन नियुक्तियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकार का दावा है कि इससे राज्य में पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा मिलेगा और नागरिकों को सूचना प्राप्त करने के अधिकार का अधिक प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होगा। वहीं आरटीआई कार्यकर्ता अब यह उम्मीद जता रहे हैं कि नए आयुक्त लंबित मामलों के त्वरित निपटारे, विभागों की जवाबदेही तय करने और सूचना अधिकार कानून की मूल भावना को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
झारखंड में सूचना का अधिकार आंदोलन लंबे समय से नागरिक अधिकारों की लड़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक हजारों लोगों ने आरटीआई का उपयोग कर विकास योजनाओं, सरकारी खर्च, नियुक्तियों, भूमि मामलों, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और अन्य सार्वजनिक हित के मुद्दों से जुड़ी जानकारियां हासिल की हैं। कई मामलों में आरटीआई के माध्यम से अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा भी हुआ है। इसलिए सूचना आयोग की मजबूती को लोकतंत्र की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है।
नई नियुक्तियों के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सूचना आयोग लंबित मामलों के निपटारे की गति को कितना बढ़ा पाता है और आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय दिलाने में कितनी सफलता हासिल करता है। पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बढ़ती जन अपेक्षाओं के बीच यह नियुक्तियां झारखंड के प्रशासनिक ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही हैं।
सूचना के अधिकार को लोकतंत्र का प्रहरी कहा जाता है। ऐसे में झारखंड राज्य सूचना आयोग में चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति न केवल एक प्रशासनिक निर्णय है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों, सुशासन और पारदर्शी शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम भी है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का वास्तविक प्रभाव आयोग की कार्यशैली, लंबित मामलों के निपटारे की गति और नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था में दिखाई देगा।
Reviewed by PSA Live News
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10:16:00 pm
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