उद्यास्तमन सेवा, महाभिषेक और वेदघोष से गुंजायमान हुआ मंदिर परिसर, हजारों श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया श्रीनिवास का आशीर्वाद
रांची, 11 जून। अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की पावन कामदा-पुरुषोत्तमी एकादशी के शुभ अवसर पर राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर के समीप रातू रोड स्थित दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में भक्ति, श्रद्धा और वैदिक परंपराओं का अनुपम संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में आयोजित उद्यास्तमन सेवा और महाभिषेक महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस धार्मिक आयोजन को आध्यात्मिक महापर्व का स्वरूप प्रदान कर दिया। पूरे दिन मंदिर परिसर भगवान श्रीनिवास के जयघोष, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा।
प्रातःकालीन ब्रह्ममुहूर्त में सुबह 4:30 बजे अखिल ब्रह्मांडों के स्वामी श्री तिरुपति बालाजी के दिव्य विश्वरूप दर्शन एवं सुप्रभातम् सेवा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। जैसे ही मंदिर के गर्भगृह में सुप्रभातम् के मधुर स्वर गूंजे, उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्वयं को भगवान की दिव्य उपस्थिति में समर्पित अनुभव किया। इसके उपरांत करावलंबम्, मंगलाशासनम्, वेंकटेश ध्यानम् तथा वेंकटेश प्रपत्ति का आयोजन किया गया। वैष्णव परंपरा के अनुसार षोडशोपचार विधि से भगवान का तिरूवाराधनम् संपन्न हुआ।
इसके बाद धार्मिक आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण चरण प्रारंभ हुआ, जिसमें भगवान श्रीश्रीनिवास, श्रीदेवी-भूमिदेवी एवं आयुधवर चक्रराज सुदर्शन भगवान का भव्य महाभिषेक संपन्न कराया गया। अभिषेक के दौरान दूध, दधि, शहद, गंगाजल, डाभयुक्त जल तथा केसर और तुलसी मिश्रित पवित्र जल से क्रमवार स्नान कराया गया। हरिद्राचूर्ण का उबटन लगाकर चंदन के सुगंधित लेप से विग्रहों का अनुलेपन किया गया। इसके पश्चात शंखधारा, चक्रधारा, सहस्त्रधारा एवं कलशधारा से बार-बार अभिषेक कर भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया।
महाभिषेक के दौरान अर्चकों द्वारा वेदों एवं उपनिषदों के मंत्रों का निरंतर उच्चारण किया जाता रहा। वैदिक ऋचाओं और दिव्य ध्वनियों से पूरा मंदिर परिसर यज्ञमय वातावरण में परिवर्तित हो गया। उपस्थित श्रद्धालु मंत्रोच्चार की दिव्यता में डूबकर भाव-विभोर होते रहे। कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया।
अभिषेक के उपरांत भगवान के विग्रहों का सुगंधित इत्र एवं तेल से अभ्यंग किया गया। तत्पश्चात भगवान श्रीनिवास एवं माता श्रीदेवी-भूमिदेवी को रेशमी वस्त्रों से अलंकृत कर स्वर्णाभूषणों एवं पुष्पमालाओं से भव्य श्रृंगार अर्पित किया गया। सुसज्जित दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और आनंद से भर उठीं।
इसके बाद घंटा-घड़ियाल और शंखनाद के मध्य भगवान दम्पति को फलाहारी व्यंजनों का बालभोग अर्पित किया गया। नक्षत्र आरती, कुंभ आरती एवं कर्पूर आरती के माध्यम से क्रमबद्ध महाआरती संपन्न हुई। महाआरती के समय मंदिर परिसर में उपस्थित भक्तों ने हाथ जोड़कर भगवान के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की।
धार्मिक कार्यक्रम के अगले चरण में दिव्य कल्याण स्वरूप भगवान की महास्तुति वेदध्वनियों के साथ की गई। इसके पश्चात तदियाराधन, गोष्ठी, शठारी, तीर्थ वितरण और प्रसाद ग्रहण की परंपरागत वैष्णव प्रक्रिया पूर्ण की गई। जैसे ही मंदिर के गोपुरम फाटक श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, दर्शनार्थियों का सैलाब उमड़ पड़ा।
पूरा वातावरण "श्रीनिवासा गोविंदा, श्रीवेंकटेशा गोविंदा, वेंकट रमणा गोविंदा" के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं की लंबी कतारें भगवान के दर्शन और आशीर्वाद के लिए मंदिर परिसर में लगी रहीं। पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी भक्तिभाव से भगवान के चरणों में नतमस्तक होते दिखाई दिए।
दिनभर श्रद्धालुओं के नाम और गोत्र के अनुसार विशेष संकल्प लेकर सहस्त्रनाम अर्चना, वेंकटेश्वर अष्टोत्तर शतनाम अर्चना, लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम अर्चना तथा विभिन्न वैदिक सूक्तों का पारायण निरंतर चलता रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने भक्ति की सरिता में अवगाहन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। मंदिर प्रबंधन के अनुसार पुरुषोत्तम मास में आयोजित यह एकादशी सेवा विशेष फलदायी मानी जाती है और इसमें भाग लेने से भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
इस वर्ष आयोजित उद्यास्तमन सेवा एवं महाभिषेक के यजमान बिहार के सोनपुर निवासी श्री अभिषेक कुमार सिंह रहे, जिन्होंने पूरे श्रद्धाभाव से इस महाअनुष्ठान का संकल्प लिया।
मंदिर के अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं श्री नारायण दास जी ने सभी धार्मिक अनुष्ठानों को वैदिक विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया। उनकी अगुवाई में पूरे आयोजन में शास्त्रोक्त परंपराओं का पूर्णतः पालन किया गया।
इस भव्य धार्मिक आयोजन की सफलता में अनेक श्रद्धालुओं एवं सेवाभाव से जुड़े गणमान्य लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनमें प्रमुख रूप से श्री राम अवतार नरसरिया, श्री अनूप अग्रवाल, श्री प्रदीप नरसरिया, श्री घनश्याम दास शर्मा, श्री रंजन सिंह, श्री सुशील गाड़ोदिया, श्री ओमप्रकाश गाड़ोदिया, श्री सुशील लोहिया, श्री राजेश सुलतानिया, श्री आनंद प्रकाश अग्रवाल, श्रीमती राधिका अग्रवाल, श्रीमती उमा नरसरिया, श्रीमती सीता शर्मा, श्रीमती यशोदा देवी, श्री प्रभाष मित्तल, श्री शम्भुनाथ मिश्र एवं श्री सुशील पोद्दार सहित अनेक श्रद्धालुओं का विशेष योगदान रहा।
कामदा-पुरुषोत्तमी एकादशी के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि यह सनातन संस्कृति, वैदिक परंपराओं और सामूहिक श्रद्धा का विराट उत्सव बन गया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष, मन में भक्ति और हृदय में भगवान श्री वेंकटेश्वर के प्रति अटूट विश्वास स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। इस आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक जीवन की आपाधापी के बीच भी सनातन आस्था की जड़ें समाज में उतनी ही गहरी और सशक्त हैं, जितनी सदियों पूर्व थीं। भगवान श्रीनिवास के चरणों में उमड़ा यह जनसैलाब श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक एकता का अनुपम उदाहरण बन गया।
Reviewed by PSA Live News
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10:27:00 pm
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