मूल्य आधारित शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, रंगमंच, ध्यान, कैरियर मार्गदर्शन और सोहराय कला का अद्भुत संगम बना ABOVE का विशेष आयोजन
राँची। भा.कृ.अनु.प.-भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (ICAR-IIAB), राँची की छात्र-नेतृत्वित पहल ABOVE (Agri Biotech Students Organisation for Value Education) द्वारा संस्थान परिसर के आसपास स्थित गाँवों के वंचित एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए आयोजित दस दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिविर का गुरुवार को सफल समापन हो गया। 2 जून से 11 जून 2026 तक चले इस विशेष शिविर ने बच्चों को शिक्षा, संस्कार, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और जीवनोपयोगी कौशलों का ऐसा मंच प्रदान किया, जिसने उनके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए।
इस शिविर का उद्देश्य केवल बच्चों की छुट्टियों को उपयोगी बनाना नहीं था, बल्कि उनमें मूल्य आधारित शिक्षा, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मक अभिव्यक्ति, भावनात्मक सशक्तिकरण तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी था। संस्थान के युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के सामूहिक प्रयास से आयोजित यह कार्यक्रम समाज के वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण और प्रेरणादायी शिक्षण अनुभव पहुँचाने की दिशा में एक सराहनीय पहल बनकर उभरा।
शिविर का उद्घाटन 2 जून को भारतीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए बोगनवेलिया पौधे में जल अर्पित करने तथा बृहदारण्यक उपनिषद के एक श्लोक के सामूहिक उच्चारण के साथ किया गया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता भा.कृ.अनु.प.-आईआईएबी के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित तथा संयुक्त निदेशक डॉ. विजय पाल भड़ाना ने की। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जयंत लेक सहित शिविर की मार्गदर्शक एवं अंतरराष्ट्रीय न्यूरो-लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग (NLP) मास्टर ट्रेनर सुश्री अनीता सिंह उपस्थित थीं।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में सुश्री अनीता सिंह ने बच्चों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और आत्म-खोज का महत्व समझाया। उन्होंने आध्यात्मिक मूल्यों और आधुनिक मानसिकता विकास तकनीकों का समन्वय करते हुए विभिन्न संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, भय और सीमाओं से ऊपर उठने तथा जीवन में स्पष्ट उद्देश्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन और सकारात्मक दृष्टिकोण से कोई भी बच्चा अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है और अपने सपनों को साकार कर सकता है।
शिविर के दौरान बच्चों के लिए शैक्षणिक, सांस्कृतिक, प्रेरणादायी और अनुभवात्मक गतिविधियों की विस्तृत श्रृंखला आयोजित की गई। 3 जून को प्रसिद्ध रंगकर्मी श्री राजीव सिन्हा ने अभिनय कला, वाणी अभिव्यक्ति (वॉयस मॉड्यूलेशन), शारीरिक हाव-भाव तथा मंच संचालन की बारीकियों पर प्रशिक्षण दिया। बच्चों ने अत्यंत उत्साह के साथ "मुक्ति" नामक एक लघु नाटक प्रस्तुत किया, जिसमें नशामुक्त जीवन, स्वस्थ आदतों और सामाजिक जागरूकता का प्रभावशाली संदेश दिया गया। बच्चों की अभिनय प्रतिभा और आत्मविश्वास ने उपस्थित सभी लोगों को प्रभावित किया।
4 जून को प्रतिभागियों को सीआरपीएफ शिविर का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। इस दौरान अधिकारियों ने बच्चों को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की कार्यप्रणाली, अनुशासन, जिम्मेदारियों और राष्ट्र निर्माण में सुरक्षा बलों की भूमिका के बारे में जानकारी दी। बच्चों ने जवानों के साथ संवाद स्थापित किया और पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों में उपलब्ध कैरियर अवसरों के बारे में विस्तार से जाना। अधिकारियों ने इच्छुक विद्यार्थियों को इन सेवाओं में प्रवेश की पात्रता, आवश्यक तैयारियों और सफलता की रणनीतियों से भी अवगत कराया। यह अनुभव बच्चों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को शिविर में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। बच्चों ने एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्वच्छ पर्यावरण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा सतत विकास का संदेश दिया। उन्होंने अपने अभिनय के माध्यम से यह बताया कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रकृति का संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
6 और 7 जून को बच्चों ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन, राँची इकाई द्वारा आयोजित ध्यान एवं व्यक्तित्व विकास सत्रों में भाग लिया। इन सत्रों में उन्हें ध्यान, श्वास तकनीकों, मानसिक एकाग्रता और तनाव प्रबंधन के व्यावहारिक उपाय सिखाए गए। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों ने प्राचीन भारतीय सिक्कों एवं मुद्रा नोटों की विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसने उन्हें भारत की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से बच्चों में इतिहास के प्रति जिज्ञासा और अपने देश की विरासत के प्रति गर्व की भावना विकसित हुई।
शिविर के अंतिम चरण का संचालन प्रख्यात कलाकार एवं कलाकृति स्कूल ऑफ आर्ट्स के संस्थापक श्री धनंजय कुमार ने किया। उन्होंने बच्चों को झारखंड की विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक सोहराय कला से परिचित कराया और इसकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं की जानकारी दी। व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों ने प्राकृतिक रंगों, पारंपरिक आकृतियों और स्थानीय कलात्मक अभिव्यक्तियों का प्रयोग करते हुए चित्रकारी की विभिन्न तकनीकों को सीखा। बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक प्रतिभा उनकी पेंटिंग्स में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
शिविर के अंतिम दिन बच्चों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की एक आकर्षक प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें उनकी प्रतिभा, सृजनशीलता और सीखने के उत्साह की झलक देखने को मिली। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय सहभागिता और शिविर के सफल समापन के उपलक्ष्य में प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। बच्चों के चेहरों पर आत्मविश्वास, खुशी और उपलब्धि की चमक इस आयोजन की सफलता की गवाही दे रही थी।
ABOVE तथा भा.कृ.अनु.प.-आईआईएबी के विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों से आयोजित यह ग्रीष्मकालीन शिविर केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह मूल्य आधारित शिक्षा, आध्यात्मिकता, रंगमंच, ध्यान, सांस्कृतिक जागरूकता, कैरियर मार्गदर्शन और पारंपरिक कला का एक सशक्त संगम बनकर सामने आया। इस पहल ने यह सिद्ध किया कि यदि शैक्षणिक संस्थान सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे आएँ, तो समाज के वंचित बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण अवसर प्रदान कर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
यह शिविर बच्चों के लिए न केवल एक यादगार अनुभव बन गया, बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास, सामाजिक जागरूकता और भविष्य के सपनों को नई उड़ान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ। स्थानीय समुदाय के अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए ऐसे कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों तक भी शिक्षा और संस्कार का प्रकाश पहुँच सके।
Reviewed by PSA Live News
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10:41:00 pm
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