विश्व को एक स्वास्थ्य के सूत्र में पिरोता राजयोग मेडिटेशन : योग से मानसिक शांति और सम्पूर्ण स्वास्थ्य का संदेश
रांची। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व आयोजित विशेष कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केन्द्र, चौधरी बगान (हरमू रोड) से राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से "एक विश्व, एक स्वास्थ्य" का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य, आयुष, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने योग और राजयोग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे आधुनिक जीवन की चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), झारखंड के प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में राजयोग मेडिटेशन मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है, मन को स्थिर करता है तथा मस्तिष्क और शरीर दोनों को विश्राम देता है। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व अब भारत की प्राचीन योग परंपरा की ओर पुनः लौट रहा है और यह अनुभव कर रहा है कि समग्र स्वास्थ्य के लिए योग और विशेष रूप से राजयोग अत्यंत प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि यदि समाज के सभी वर्ग मिलकर इस अभियान से जुड़ें, तभी स्वस्थ, तनावमुक्त और सुखी समाज की स्थापना संभव होगी। उन्होंने कहा, "आइए, हम भी स्वयं को स्वस्थ और सुखी बनाने के लिए इस मिशन में अपना कदम बढ़ाएं।"
योग का वास्तविक अर्थ है आत्मा का परमात्मा से मिलन : डॉ. वकील कुमार सिंह
कार्यक्रम में उपस्थित झारखंड आयुष परिषद के रजिस्ट्रार डॉ. वकील कुमार सिंह ने योग की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि योग का अर्थ केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि "जोड़ना" या "मिलन" है। आध्यात्मिक दृष्टि से योग आत्मा और परमात्मा के संबंध का अनुभव है।
उन्होंने कहा कि अनेक ग्रंथों में योग को "चित्त की वृत्तियों का निरोध" बताया गया है, किंतु केवल विचारों को रोक देना ही योग नहीं है। वास्तविक योग वह है जिसमें मन को एकाग्र कर परमात्मा से जोड़ा जाए। तभी मनुष्य आंतरिक शांति और आत्मिक शक्ति का अनुभव कर सकता है।
आत्म-जागरूकता से दूर होती हैं भावनात्मक उलझनें : डॉ. साकेत कुमार
जिला आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. साकेत कुमार ने कहा कि मनुष्य की अधिकांश समस्याओं की जड़ स्वयं को केवल शरीर मानने की भूल है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति यह समझता है कि "मैं आत्मा हूँ, शरीर नहीं," तभी वास्तविक आत्म-जागरूकता का आरंभ होता है।
उन्होंने कहा कि शारीरिक सुखों की अंधी दौड़ व्यक्ति को ऐसे दुष्चक्र में फंसा देती है, जो तनाव, अशांति और भावनात्मक संघर्षों को जन्म देता है। आत्मिक चेतना इन समस्याओं से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त करती है।
योग हमारे जीवन का स्वाभाविक हिस्सा था : डॉ. अमिता मजूमदार
झारखंड राय विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. अमिता मजूमदार ने कहा कि स्वयं को चैतन्य ज्योति बिंदु और प्रकाशपुंज के रूप में अनुभव करना आत्म-जागरण का आधार है। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति में योग कभी दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करता था, लेकिन बदलती जीवनशैली के कारण आज लोगों को योग का महत्व पुनः याद दिलाने की आवश्यकता पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि योग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष दिवसों का आयोजन किया जाता है।
विश्व एकता का महामंत्र है योग : सुनील कुमार गुप्ता
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सेवानिवृत्त एजीएम सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि योग केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि विश्व बंधुत्व और मानव एकता का संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि आज विभाजित होते समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी सूत्र योग ही है।
उन्होंने कहा, "इस जहान को एकता के सूत्र में बांधने का महामंत्र है—योग।"
योग मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है : ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन
कार्यक्रम में विचार व्यक्त करते हुए ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि योग भारत की लगभग पाँच हजार वर्ष पुरानी ऐसी जीवन-पद्धति है, जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने की क्षमता रखती है।
उन्होंने कहा कि योग शरीर और मन के बीच संवाद का सहज मार्ग है, आत्मा और परमात्मा के बीच की दूरी को समाप्त करने का माध्यम है तथा कर्म और उसके फल के संबंध को समझने की शक्ति प्रदान करता है। योग मनुष्य को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सर्वहित की भावना से जोड़ता है।
उन्होंने कहा कि "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" की भावना को साकार करने वाला सहज मार्ग योग ही है, जो सम्पूर्ण स्वास्थ्य और वैश्विक कल्याण की दिशा में मानवता का मार्गदर्शन करता है।
मुविंग मेडिटेशन और प्राणायाम का कराया गया अभ्यास
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों को मुविंग मेडिटेशन, सहज राजयोग मेडिटेशन, कटी संचालन, गर्दन संचालन, हस्त संचालन तथा विभिन्न प्राणायामों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही मानसिक सशक्तिकरण के अनेक प्रयोग कराए गए, जिससे उपस्थित लोगों ने तनावमुक्त जीवन और सकारात्मक सोच के महत्व को समझा।
इस अवसर पर डॉ. कृष्ण कुमार (आयुष आयुर्वेद उपनिदेशक) एवं पूजा अग्रवाल (समर्पण शाखा की पूर्व अध्यक्ष) सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
राजयोग का संदेश : स्वस्थ मन, स्वस्थ समाज
कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि आधुनिक युग की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना केवल दवाओं से नहीं, बल्कि जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन, आत्म-जागरूकता और योग को अपनाकर भी किया जा सकता है। राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को स्वयं से जोड़ते हुए समाज और विश्व को स्वास्थ्य, शांति और सद्भाव के सूत्र में पिरोने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
संवाददाता : राजेश कुमार।
Reviewed by PSA Live News
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10:14:00 pm
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