अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस 17 जुलाई: न्याय, मानवाधिकार और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश
कानून से ऊपर कोई नहीं, न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की है महत्वपूर्ण भूमिका : संजय सर्राफ
रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष एवं झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस के अवसर पर कहा कि यह दिवस विश्वभर में न्याय, मानवाधिकार, कानून के शासन (रूल ऑफ लॉ) तथा वैश्विक शांति के प्रति लोगों को जागरूक करने और उनकी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई को मनाया जाने वाला यह दिवस पूरी मानवता को यह संदेश देता है कि न्याय ही किसी भी सभ्य, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण समाज की सबसे मजबूत आधारशिला है।
संजय सर्राफ ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस वर्ष 1998 में रोम संविधि (Rome Statute) को अपनाए जाने की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है। इसी ऐतिहासिक संधि के आधार पर अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (International Criminal Court-ICC) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस न्यायालय का उद्देश्य युद्ध अपराध, नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध तथा आक्रमण जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाना और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी वैश्विक व्यवस्था स्थापित करना है।
उन्होंने कहा कि इस दिवस का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना ही शक्तिशाली या प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं हो सकता। न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करना, मानव गरिमा को सुरक्षित रखना तथा समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखना भी है।
संजय सर्राफ ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व के अनेक देशों में युद्ध, आतंकवाद, जातीय हिंसा, मानवाधिकारों का हनन और अन्य गंभीर अपराध लगातार चुनौती बने हुए हैं। ऐसे दौर में अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था वैश्विक शांति, मानवता की सुरक्षा और न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रभावी न्याय प्रणाली भविष्य में होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ पीड़ितों के मन में न्याय के प्रति विश्वास भी कायम करती है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के हित से जुड़ा हुआ दिवस है। इस अवसर पर विश्वभर में संगोष्ठियों, विधिक जागरूकता कार्यक्रमों, परिचर्चाओं, मानवाधिकार अभियानों, शैक्षणिक गतिविधियों तथा जन-जागरूकता अभियानों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों में न्यायविद, विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद, सामाजिक संगठन तथा युवा वर्ग सक्रिय भागीदारी निभाते हुए कानून के शासन और मानवाधिकारों की रक्षा के महत्व पर लोगों को जागरूक करते हैं।
संजय सर्राफ ने कहा कि आज के समय में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक जीवन, लोकतांत्रिक मूल्यों और मानव गरिमा से जुड़ा व्यापक विषय बन चुका है। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह कानून का सम्मान करे, दूसरों के अधिकारों की रक्षा करे, सामाजिक समानता को बढ़ावा दे तथा न्यायपूर्ण और उत्तरदायी समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस हमें सत्य, समानता, न्याय, उत्तरदायित्व और मानव गरिमा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। यदि विश्व के सभी राष्ट्र और नागरिक इन सिद्धांतों के प्रति ईमानदारी से प्रतिबद्ध रहें, तो एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित, लोकतांत्रिक और समृद्ध वैश्विक समाज की स्थापना का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यही अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस का वास्तविक उद्देश्य और सबसे बड़ा संदेश है।
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7:37:00 pm
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