— अशोक कुमार झा
संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्वजन विकास पार्टी
लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति केवल चुनाव नहीं होती, बल्कि जनता का विश्वास होता है। जब जनता यह महसूस करती है कि उसकी आवाज सुनी जा रही है, न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष है और सत्ता जनता के प्रति जवाबदेह है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है। लेकिन जब किसी विवादास्पद घटना के बाद समाज में प्रश्न उठने लगते हैं, परिवार न्याय की मांग करने लगता है और सरकार तथा प्रशासन की भूमिका पर बहस शुरू हो जाती है, तब लोकतंत्र की वास्तविक परीक्षा प्रारंभ होती है।
हाल के दिनों में बिहार में भारत तिवारी प्रकरण को लेकर जिस प्रकार की चर्चाएं, विरोध-प्रदर्शन, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और जनभावनाएं सामने आई हैं, उसने पूरे राज्य ही नहीं बल्कि देशभर के नागरिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। इस घटना को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच अलग-अलग मत हैं। कोई इसे कानून-व्यवस्था का मामला मानता है, कोई न्यायिक जांच की आवश्यकता पर बल देता है और कोई प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहा है।
ऐसे समय में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा पीड़ित परिवार से मिलना, शोक संतप्त माता को सांत्वना देना और निष्पक्ष जांच की मांग करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। लोकतंत्र में संवेदनशील नेतृत्व वही होता है जो सत्ता और विपक्ष की सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता के पक्ष में खड़ा होने का साहस रखता हो। किसी भी पीड़ित परिवार के आंसू पोंछना राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे सहित अनेक जनप्रतिनिधियों द्वारा भी घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं विभिन्न विपक्षी दल सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर सरकार का पक्ष है कि मामले की जांच प्रक्रिया जारी है और सत्य सामने आने दिया जाना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यही स्वस्थ परंपरा है कि अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकले।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या आज आम नागरिक को यह विश्वास है कि उसकी आवाज सत्ता के गलियारों तक पहुंच रही है? क्या प्रशासनिक तंत्र जनता के प्रति उतना ही संवेदनशील है जितना उसे होना चाहिए? क्या किसी भी विवादास्पद घटना के बाद सरकार की प्राथमिकता केवल कानूनी प्रक्रिया रह जाती है या जनभावनाओं को भी पर्याप्त महत्व दिया जाता है?
सर्वजन विकास पार्टी का स्पष्ट मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास होता है। यदि जनता के मन में संदेह पैदा होने लगे, यदि लोग यह महसूस करने लगें कि उनकी पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, तो यह किसी भी सरकार के लिए चेतावनी का संकेत है। लोकतंत्र में केवल कानून का शासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्याय होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
आज बिहार सहित पूरे देश में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक ध्रुवीकरण है। दुर्भाग्य से अनेक राजनीतिक दल समाज को जाति, वर्ग, धर्म और वोट बैंक के आधार पर विभाजित करने में अधिक रुचि दिखाते हैं, जबकि जनता विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय चाहती है।
सर्वजन विकास पार्टी का मानना है कि समाज को अगड़ा-पिछड़ा, ऊंच-नीच, जाति और उपजाति के आधार पर बांटकर कोई भी राज्य या राष्ट्र मजबूत नहीं बन सकता। इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज विभाजित हुआ है, तब-तब विकास बाधित हुआ है। इसलिए आज आवश्यकता जातिवादी राजनीति की नहीं, बल्कि सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय की राजनीति की है।
यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी भी घटना पर राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर निष्पक्ष जांच हो। यदि कोई दोषी है तो उसे कानून के अनुसार कठोर दंड मिले, और यदि कोई निर्दोष है तो उसे न्याय मिले। यही लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है। न्याय का अर्थ केवल सजा नहीं, बल्कि सत्य की स्थापना भी है।
भारतीय जनता पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस या कोई भी राजनीतिक दल हो—सभी को यह समझना होगा कि जनता अब पहले जैसी नहीं रही। डिजिटल युग में हर घटना पर जनता की नजर है। सूचना तेजी से फैलती है और लोग अपने निष्कर्ष भी बनाते हैं। इसलिए सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
बिहार की जनता ने हमेशा उन सरकारों का समर्थन किया है जिन्होंने सुशासन, विकास और न्याय की दिशा में कार्य किया है। जनता की अपेक्षा केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की होती है। यदि किसी सरकार से जनता का विश्वास कमजोर होता है तो लोकतंत्र में उसका उत्तर भी जनता ही देती है।
आज आवश्यकता है कि सभी राजनीतिक दल आत्ममंथन करें। सत्ता पक्ष अपनी जवाबदेही को समझे, विपक्ष रचनात्मक भूमिका निभाए और प्रशासन जनता के प्रति अधिक संवेदनशील बने। न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही ही वह आधार हैं जिन पर एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था खड़ी होती है।
सर्वजन विकास पार्टी देशवासियों से आह्वान करती है कि वे जाति, धर्म, क्षेत्र और दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर न्याय, ईमानदारी, पारदर्शिता और सुशासन की मांग करें। किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जागरूक नागरिक होते हैं। जब जनता सजग होती है तो व्यवस्था स्वयं को सुधारने के लिए बाध्य होती है।
समय आ गया है कि हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाएं जहां किसी नागरिक को न्याय के लिए संघर्ष न करना पड़े, जहां सत्ता सेवा का माध्यम बने और जहां राजनीति का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण हो।
लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान नहीं करता, बल्कि जागरूक जनता करती है। इसलिए जागिए, संगठित होइए और न्यायपूर्ण, भ्रष्टाचारमुक्त तथा समरस भारत के निर्माण के लिए आगे आइए।
जय हिंद।
Reviewed by PSA Live News
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11:40:00 pm
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