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26 दिन के छात्र आंदोलन के बाद नया मोड़: नियुक्तियां रद्द, कोर्ट की रोक से छात्रों में फिर बढ़ा आक्रोश


रांची।
झारखंड की राजधानी रांची में अपनी मांगों को लेकर 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन का घटनाक्रम अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार द्वारा विवादित नियुक्तियों को रद्द किए जाने के बाद आंदोलनरत अभ्यर्थियों को लगा था कि उनकी मांगों पर सरकार ने गंभीरता से कदम उठाया है। छात्रों की प्रमुख मांगों में पूर्व में की गई नियुक्तियों को रद्द करना और पूरे मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) से जांच कराना शामिल था।

सरकार द्वारा नियुक्तियां रद्द किए जाने के बाद छात्रों ने इसे अपनी आंशिक जीत के रूप में देखा। सरकार की ओर से उन्हें निष्पक्ष जांच और पूरे मामले में न्यायपूर्ण कार्रवाई का भरोसा भी दिया गया। इसी भरोसे के बाद छात्रों के आंदोलन का रुख नरम पड़ा और अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार भी जताया।

लेकिन इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। नियुक्तियां रद्द किए जाने के सरकार के फैसले को प्रभावित अभ्यर्थियों ने न्यायालय में चुनौती दी। न्यायालय ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद आंदोलनरत छात्रों में यह भावना मजबूत हुई कि सरकार ने उनकी मांग को स्वीकार कर आंदोलन तो समाप्त करा दिया, लेकिन नियुक्तियां रद्द करने के फैसले की कानूनी स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण पूरा मामला फिर उलझ गया।

छात्रों का आरोप—सरकार ने आंदोलन खत्म कराया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ

आंदोलनरत छात्रों का आरोप है कि सरकार को पहले से अंदाजा था कि नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले को प्रभावित अभ्यर्थी न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। उनका कहना है कि जिन अभ्यर्थियों ने लंबे समय से नौकरी की है और जिनकी नियुक्तियां सरकारी प्रक्रिया के तहत हुई थीं, उनकी नियुक्ति अचानक समाप्त किए जाने पर न्यायालय की शरण लेना स्वाभाविक था।

छात्रों का यह भी आरोप है कि सरकार इस पूरे मामले में न्यायालय के समक्ष अपने फैसले का मजबूत पक्ष नहीं रख सकी। उनका सवाल है कि जब नियुक्तियां स्वयं सरकारी प्रक्रिया के तहत की गई थीं, तो बाद में उन्हें रद्द करने के फैसले को सरकार किस आधार पर मजबूती से न्यायालय के सामने रखती?

आभार यात्रा से प्रेस कॉन्फ्रेंस तक बदला छात्रों का रुख

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा बदलाव छात्रों के रुख में देखने को मिला है। कुछ दिन पहले तक जो अभ्यर्थी मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए यात्रा निकाल रहे थे, वही छात्र अब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर छलावे और धोखे का आरोप लगा रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि 26 दिनों तक उन्होंने धरना, प्रदर्शन और अनशन के माध्यम से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष किया। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान करेगी। लेकिन नियुक्तियां रद्द किए जाने के बाद न्यायालय की रोक ने पूरे मामले को फिर पुराने सवालों के बीच खड़ा कर दिया है।

आंदोलन स्थल भी खाली कराया गया

इधर, जयपाल सिंह स्टेडियम में चल रहे आंदोलन को भी समाप्त करा दिया गया है। आंदोलन से जुड़े टेंट और अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं को वहां से हटा दिया गया है। साथ ही अब जयपाल सिंह स्टेडियम में आंदोलन नहीं करने देने संबंधी आदेश भी जारी किए जाने की बात सामने आई है।

छात्रों का कहना है कि एक ओर उनकी मांगों को लेकर सरकार ने फैसला लिया, वहीं दूसरी ओर आंदोलन स्थल को खाली करा दिया गया। ऐसे में उन्हें लगता है कि आंदोलन को समाप्त कराने के बाद भी मूल समस्या का समाधान नहीं हो पाया।

अब आगे क्या करेंगे छात्र?

न्यायालय की रोक और आंदोलन स्थल खाली कराए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्र आगे की रणनीति क्या तय करेंगे। क्या अभ्यर्थी दोबारा आंदोलन की राह पर लौटेंगे? क्या वे न्यायालय में अपनी लड़ाई तेज करेंगे? या फिर सरकार के खिलाफ नए सिरे से आंदोलन और घेराव की रणनीति तैयार की जाएगी?

फिलहाल छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों के अगले कदम पर सबकी नजर है। 26 दिनों के लंबे आंदोलन के बाद जिस समय लगा था कि सरकार और छात्रों के बीच सहमति बन गई है, उसी समय घटनाक्रम के बदलने से पूरा विवाद एक बार फिर गरमा गया है।

अब लड़ाई केवल नियुक्तियों की नहीं, बल्कि छात्रों के उस भरोसे की भी है जो उन्होंने सरकार के आश्वासन पर किया था। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पूरे मामले का स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान कैसे निकालती है।

26 दिन के छात्र आंदोलन के बाद नया मोड़: नियुक्तियां रद्द, कोर्ट की रोक से छात्रों में फिर बढ़ा आक्रोश 26 दिन के छात्र आंदोलन के बाद नया मोड़: नियुक्तियां रद्द, कोर्ट की रोक से छात्रों में फिर बढ़ा आक्रोश Reviewed by PSA Live News on 6:16:00 pm Rating: 5

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