रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की पत्रकार वार्ता, बोले—खनिज संपदा पर पहला अधिकार राज्यों का, लगभग 90 प्रतिशत राजस्व राज्यों को मिलता रहेगा
रांची। रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ ने शुक्रवार को अपने केंद्रीय कार्यालय में MMDR विधेयक-2026 को लेकर पत्रकार वार्ता की। उन्होंने विधेयक को झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों के लिए महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला कदम बताते हुए कहा कि इससे राज्य के खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, निवेश, रोजगार और राजस्व वृद्धि को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि देश और राज्यों की आर्थिक ताकत है। इसका उपयोग विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए होना चाहिए, न कि अवैध खनन, चोरी, भ्रष्टाचार और लालफीताशाही की भेंट चढ़ना चाहिए।
संजय सेठ ने कहा कि MMDR विधेयक-2026 राज्यों के हितों को मजबूत करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विपक्ष पर विधेयक को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यों के अधिकार और राजस्व हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है।
लगभग 90 प्रतिशत खनिज राजस्व राज्यों को मिलता रहेगा
रक्षा राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि खनिज संपदा पर राज्यों का महत्वपूर्ण अधिकार बना रहेगा और खनिज राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि इससे राज्यों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और प्राप्त राजस्व का उपयोग सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, ग्रामीण विकास, रोजगार तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्य के लिए खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और तेजी का सीधा लाभ राज्य की अर्थव्यवस्था तथा आम जनता को मिलेगा। उनका कहना था कि राज्य की खनिज संपदा का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब खनन प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त हो।
अवैध खनन और खनिज चोरी पर जीरो टॉलरेंस
संजय सेठ ने कहा कि सरकार की नीति अवैध खनन और खनिज चोरी के प्रति जीरो टॉलरेंस की है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन से सरकार को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ पर्यावरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था और वैध कारोबार को भी नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि जितना अधिक वैध और व्यवस्थित खनन बढ़ेगा तथा जितना प्रभावी ढंग से अवैध खनन पर रोक लगेगी, उतना ही अधिक राजस्व सरकारों को प्राप्त होगा। इससे विकास योजनाओं के लिए संसाधन बढ़ेंगे और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
2014 के मुकाबले खनिज राजस्व में भारी वृद्धि
रक्षा राज्य मंत्री ने खनिज क्षेत्र से प्राप्त राजस्व के आंकड़े रखते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पहले राज्य को खनिज क्षेत्र से लगभग 4,662 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 33,494 करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने इसे लगभग 618 प्रतिशत की वृद्धि बताते हुए कहा कि खनिज क्षेत्र में राजस्व संग्रह को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की नीतियों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि अब केवल राजस्व बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी पारदर्शी, स्थिर और अनुमानित कर व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे देश और राज्य में निवेश का वातावरण बेहतर हो। निवेश बढ़ने से उत्पादन बढ़ेगा और उत्पादन के साथ रोजगार तथा सहायक उद्योगों को भी गति मिलेगी।
खनिज संपदा पर राजनीति नहीं, ठोस नीति की जरूरत
संजय सेठ ने कहा कि खनिज संपदा के उपयोग को लेकर राजनीति करने के बजाय ठोस नीति पर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत में पर्याप्त खनिज संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद यदि देश को बड़े पैमाने पर कोयला आयात करना पड़ता है तो इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करना होगा।
उन्होंने कहा कि घरेलू खनन को बढ़ावा देकर, प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, परियोजनाओं को समय पर मंजूरी देकर और अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई करके भारत को खनिज क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि खनन का प्रभाव केवल खदान तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवहन, निर्माण, मशीनरी, व्यापार, सेवा क्षेत्र और स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। इसलिए खनन क्षेत्र में वैध और जिम्मेदार विस्तार का व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ता है।
परियोजनाओं में अनावश्यक देरी पर उठाए सवाल
रक्षा राज्य मंत्री ने झारखंड में खनन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में नीलामी पूरी होने के बावजूद कई परियोजनाएं निर्धारित समय पर ऑपरेशनल नहीं हो पाती हैं। उन्होंने सिंहभूम के विजया-2 प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि लगभग नौ महीने तक लीज नहीं मिलने के कारण राज्य को करीब 400 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि जब झारखंड खनिज संसाधनों से समृद्ध है, तब प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी के कारण राजस्व और रोजगार के अवसरों को रोकना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, “झारखंड को खनिज चाहिए, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है कि झारखंड को खनिज से मिलने वाला पूरा लाभ मिले। अवैध खनन और प्रशासनिक देरी दोनों पर कठोरता से रोक लगानी होगी।”
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
संजय सेठ ने कहा कि खनन क्षेत्र में सुधार का सीधा असर युवाओं के रोजगार पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कोयला और अन्य खनिजों के उत्पादन में वृद्धि के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, मशीनरी, निर्माण, होटल, छोटे कारोबार और सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि खनिज आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं पैदा होंगी।
नक्सलवाद के बाद खनिज चोरी के खिलाफ निर्णायक अभियान
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाया गया है और देश में नक्सली हिंसा को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि अब खनिज चोरी और अवैध खनन पर भी प्रभावी अंकुश लगाने की जरूरत है, ताकि खनिज संसाधनों से मिलने वाला लाभ जनता और राज्य के विकास में इस्तेमाल हो सके।
उन्होंने कहा कि खनिज संपदा की सुरक्षा केवल राजस्व का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हित का विषय भी है।
विकसित भारत के निर्माण में खनिज क्षेत्र की अहम भूमिका
संजय सेठ ने कहा कि MMDR विधेयक-2026 को केवल खनन क्षेत्र से जुड़ा विधेयक मानना उचित नहीं होगा। इसका व्यापक प्रभाव राज्यों की आय, निवेश, रोजगार, औद्योगिक विकास और देश की आत्मनिर्भरता पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक, पारदर्शी और जिम्मेदार उपयोग हो। इससे राज्यों की आय बढ़े, युवाओं को रोजगार मिले, उद्योगों को कच्चा माल मिले और देश की आयात पर निर्भरता कम हो।
विपक्ष से भ्रम नहीं, बहस और सहयोग की अपील
रक्षा राज्य मंत्री ने विपक्ष से अपील की कि वह विधेयक के प्रावधानों को समझे और राजनीतिक विरोध के लिए भ्रम पैदा करने के बजाय राज्यों तथा देश के व्यापक हित में सकारात्मक बहस करे। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग राजनीतिक टकराव का विषय नहीं, बल्कि विकास और नीति का विषय होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार खनिज संपदा के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थिर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अंत में संजय सेठ ने कहा कि “खनिज संपदा भारत की ताकत है। इसे चोरी, भ्रष्टाचार और लालफीताशाही की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। खनिज संसाधनों का उपयोग राष्ट्र निर्माण, राज्यों के विकास, युवाओं के रोजगार और विकसित भारत के निर्माण के लिए किया जाएगा।”
उन्होंने विश्वास जताया कि MMDR विधेयक-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन से झारखंड सहित खनिज संपदा वाले राज्यों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और विकास की गति तेज करने में मदद मिलेगी।
Reviewed by PSA Live News
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5:26:00 pm
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