डॉ. जगन्नाथ मिश्र की 7वीं पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन: बिहार के विकास और जनसेवा में उनका योगदान सदैव स्मरणीय — अशोक कुमार झा
रांची/ पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री, परम श्रद्धेय डॉ. जगन्नाथ मिश्र की 7वीं पुण्यतिथि पर सर्वजन विकास पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार झा ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र का व्यक्तित्व और कृतित्व बिहार के राजनीतिक एवं सामाजिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। बिहार के विकास, जनहित, शिक्षा, प्रशासन और आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाता रहेगा।
अशोक कुमार झा ने कहा कि “आज भले ही वह सशरीर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी स्मृतियां, उनका स्नेह, उनकी मानवीय संवेदनाएं और जनसेवा के प्रति उनका समर्पण आज भी हम सभी के जीवन को दिशा और प्रेरणा देता है।” डॉ. मिश्र का निधन 19 अगस्त 2019 को हुआ था। उनकी सातवीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए अशोक कुमार झा ने कहा कि उनका जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझने और उनके समाधान का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र का बिहार और बिहारवासियों के प्रति समर्पण जीवन के अंतिम दौर तक अटूट रहा। स्वास्थ्य और उम्र से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद वे बिहार की समस्याओं, राज्य के भविष्य और आम जनता की आकांक्षाओं को लेकर चिंतित रहते थे। “बिहार की पीड़ा से जुड़िए” जैसे प्रयासों के माध्यम से उन्होंने अंतिम समय तक प्रदेश की वास्तविक समस्याओं और जनभावनाओं को समझने तथा उन्हें व्यापक विमर्श का विषय बनाने का प्रयास किया।
अशोक कुमार झा ने कहा कि डॉ. मिश्र के जीवन की एक विशेषता यह थी कि उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं माना। उनके लिए राजनीति का मूल उद्देश्य समाज और जनता की सेवा था। उनके पास अपनी समस्या लेकर आने वाले व्यक्ति को वे उसकी जाति, धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं देखते थे, बल्कि उसकी समस्या को मानवीय दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करते थे।
उन्होंने कहा कि “डॉ. जगन्नाथ मिश्र के पास फरियाद लेकर आने वाला व्यक्ति निराश होकर लौटे, यह उनकी कार्यशैली के अनुरूप नहीं था। वे सामने वाले की बात धैर्यपूर्वक सुनते थे और अपनी क्षमता के अनुसार उसकी मदद करने का प्रयास करते थे।”
अशोक कुमार झा ने कहा कि डॉ. जगन्नाथ मिश्र की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यही जनसरोकार था। समाज के विभिन्न वर्गों और अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग उनके संपर्क में रहते थे। यहां तक कि राजनीतिक जीवन में उनके घोर विरोधी रहे लोग भी जब किसी व्यक्तिगत अथवा जनहित की समस्या को लेकर उनके पास पहुंचते थे, तो वे उनकी बात को भी गंभीरता से सुनते थे। व्यक्तिगत राजनीतिक मतभेदों को मानवीय संबंधों के बीच दीवार नहीं बनने देना उनके व्यक्तित्व की बड़ी विशेषता थी।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब राजनीति में जातीय और धार्मिक ध्रुवीकरण को लेकर लगातार बहस होती है, तब डॉ. जगन्नाथ मिश्र जैसे नेताओं की कार्यशैली और राजनीतिक सोच को याद करना और भी प्रासंगिक हो जाता है। उनका मानना था कि समाज को जोड़कर ही राज्य और देश का विकास किया जा सकता है। जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल अपने समर्थकों के प्रति नहीं, बल्कि पूरे समाज के प्रति होता है।
अशोक कुमार झा ने कहा कि बिहार की राजनीति में डॉ. जगन्नाथ मिश्र का योगदान बहुआयामी रहा। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास से जुड़े कई मुद्दों पर काम किया। शिक्षा और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों को लेकर उनकी राजनीतिक सक्रियता लंबे समय तक चर्चा में रही। उनके राजनीतिक जीवन का एक बड़ा हिस्सा बिहार की समस्याओं को समझने और राज्य के विकास की संभावनाओं पर विचार करने में बीता।
उन्होंने कहा कि डॉ. मिश्र के जीवन का अंतिम दौर भी बिहार की चिंता से मुक्त नहीं था। वे लगातार यह सोचते रहे कि बिहार को किस प्रकार विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाया जाए और राज्य के युवाओं को बेहतर अवसर कैसे उपलब्ध कराए जाएं। उनकी अंतिम पुस्तक “बिहार बढ़कर रहेगा” इसी आशावादी दृष्टिकोण का प्रतीक मानी जाती है। देहावसान से कुछ समय पूर्व इस पुस्तक का विमोचन पूर्व राष्ट्रपति एवं भारत रत्न श्रद्धेय प्रणब मुखर्जी द्वारा किया गया था।
अशोक कुमार झा ने कहा कि किसी भी महान व्यक्ति की वास्तविक विरासत केवल उनकी स्मृतियों में नहीं, बल्कि उनके विचारों और कार्यों में जीवित रहती है। डॉ. जगन्नाथ मिश्र की सबसे बड़ी विरासत बिहार के प्रति उनका विश्वास, जनता के प्रति उनका जुड़ाव और सामाजिक समरसता के प्रति उनकी सोच है। आने वाली पीढ़ियों को उनके राजनीतिक जीवन का मूल्यांकन केवल सत्ता और पद के संदर्भ में नहीं, बल्कि उस दौर की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “बिहार जब तक रहेगा, तब तक बिहार की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में डॉ. जगन्नाथ मिश्र का नाम स्मरण किया जाता रहेगा। उनके जैसे नेताओं को समय की धूल में दबाया नहीं जा सकता, क्योंकि उनका जीवन और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए अध्ययन और स्मरण का विषय बना रहता है।”
सर्वजन विकास पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार झा ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि राजनीति में व्यक्तिगत कटुता और सामाजिक विभाजन के स्थान पर संवाद, संवेदना, सेवा और विकास की राजनीति को मजबूत किया जाए। डॉ. जगन्नाथ मिश्र के सार्वजनिक जीवन से यही संदेश लिया जा सकता है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन जनता के हित और मानवीय संवेदना उससे ऊपर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिहार की वर्तमान और भावी राजनीति को यदि विकास, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय, प्रशासनिक पारदर्शिता और सामाजिक सद्भाव की दिशा में आगे बढ़ना है तो नेताओं को जनता के बीच जाकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझना होगा। जनता से जुड़ाव, समस्याओं को सुनने की क्षमता और हर व्यक्ति के प्रति सम्मान लोकतांत्रिक राजनीति की बुनियादी शर्तें हैं।
डॉ. जगन्नाथ मिश्र की 7वीं पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए अशोक कुमार झा ने कहा कि वे केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री या पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि बिहार के सार्वजनिक जीवन की एक महत्वपूर्ण शख्सियत के रूप में याद किए जाते रहेंगे।
उन्होंने अंत में कहा—“उनकी स्मृतियां आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी मानवीय संवेदना, बिहार के प्रति उनका समर्पण और जनसेवा की उनकी भावना को नमन करते हुए मैं उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और हमें उनके सकारात्मक विचारों से प्रेरणा लेकर समाज एवं देश के हित में कार्य करने की शक्ति दें।”
— अशोक कुमार झा
संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्वजन विकास पार्टी
प्रधान संपादक, रांची दस्तक एवं PSA लाइव न्यूज
वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक
Reviewed by PSA Live News
on
7:59:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: