संवाददाता- सुजीत कुमार मिश्र
मधुबनी । संदीप विश्वविद्यालय, सिजौल, मधुबनी के श्री नित्यानंद झा स्कूल ऑफ एजुकेशन में शनिवार को राखी मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें बी.एड. एवं डी.एल.एड. के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मक एवं कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने रंग-बिरंगी एवं आकर्षक राखियाँ तैयार कीं। प्राकृतिक सामग्री से निर्मित राखियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
कार्यक्रम शिक्षा विभाग के डीन डॉ. ज्योतिन्द्र कुमार पाठक एवं प्राचार्य डॉ. बिधनचंद्र चौधरी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के समन्वयक सहायक प्राध्यापक सुजीत कुमार मिश्र रहे। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पारंपरिक कला, नवाचार, सौंदर्यबोध और पर्यावरणीय संवेदनशीलता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर डॉ. ज्योतिन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि राखी भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक होने के साथ भारतीय संस्कृति और लोक परंपरा की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है। ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों की रचनात्मकता, कल्पनाशीलता एवं सहयोग की भावना को विकसित करती हैं। प्राकृतिक सामग्री का उपयोग पर्यावरण के प्रति उनकी जागरूकता को भी दर्शाता है।
प्राचार्य डॉ. बिधनचंद्र चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 अनुभवात्मक, रचनात्मक एवं कौशल-आधारित शिक्षा पर बल देती है। राखी निर्माण जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को ‘करके सीखने’ तथा कला, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़ने का अवसर प्रदान करती हैं। इससे उनके सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिलता है।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में विधि विभाग की सहायक प्राध्यापिका सुश्री अर्चिता झा, सुश्री नंदनी कुमारी एवं सुश्री शाहिस्ता परवीन शामिल रहीं। निर्णायकों ने राखियों का मूल्यांकन रचनात्मकता, मौलिकता, कलात्मकता, प्रस्तुतीकरण एवं प्राकृतिक सामग्री के उपयोग के आधार पर किया।
कार्यक्रम में डॉ. उमाकर ठाकुर, डॉ. विमल कुमार कर्ण, डॉ. राकेश रंजन, प्रो. प्रत्यूष नंदन, प्रो. आनंद मोहन झा, प्रो. ए. चौधरी, डॉ. अमजद कमल सहित विभाग के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता को लेकर छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखा गया।
समापन पर कार्यक्रम समन्वयक प्रो. सुजीत कुमार मिश्र ने निर्णायकों, शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच देने के साथ उन्हें भारतीय संस्कृति, कला और रचनात्मक परंपराओं से जोड़ते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार की गतिविधियाँ निरंतर आयोजित किए जाने की बात कही।
प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों में रचनात्मकता, उत्साह एवं सांस्कृतिक चेतना का संचार करते हुए कार्यक्रम को सफल एवं यादगार बना दिया।
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7:39:00 pm
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