कृषक-वैज्ञानिक मिलन में उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक, जैविक खेती और फसल विविधीकरण पर विशेष जोर
मधुबनी, 8 सितंबर। कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा), मधुबनी एवं कृषि विज्ञान केंद्र, सुखेत, झंझारपुर के संयुक्त तत्वावधान में कृषक-वैज्ञानिक मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी स्थानीय कृषि समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराने के साथ-साथ आधुनिक एवं उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देना रहा।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. राहुल सिंह राजपूत ने किसानों को बीज उपचार, धान की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन तथा कृषि क्षेत्र में अपनाई जा रही नवीनतम तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने तथा फसल की शुरुआती अवस्था से ही कीट एवं रोगों की निगरानी करने की अपील की।
वहीं कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगपाल ने पशुओं में होने वाली लम्पी बीमारी, उसके प्रमुख लक्षण, बचाव एवं नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने पशुपालकों को पशुओं की स्वच्छता, समय पर पहचान और आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक किया।
कृषि विभाग के उप परियोजना निदेशक नंदन ने किसानों को उन्नत बीज एवं फसल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक के प्रयोग, कीट एवं रोग प्रबंधन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जल संरक्षण, कृषि यंत्रीकरण, उद्यानिकी फसलों तथा फसल विविधीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
किसानों ने रखीं अपनी समस्याएं
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने खेती-किसानी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और जिज्ञासाओं को कृषि वैज्ञानिकों के समक्ष रखा। वैज्ञानिकों ने स्थानीय परिस्थितियों एवं किसानों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक और वैज्ञानिक सुझाव देकर उनकी समस्याओं का समाधान किया।
किसानों को बताया गया कि कम लागत में अधिक उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण उपज और बेहतर आमदनी के लिए पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना जरूरी है। उन्नत बीज, मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक का प्रयोग, जल संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा फसल विविधीकरण जैसे उपाय किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
किसान का अनुभव और वैज्ञानिक ज्ञान बने विकास की ताकत
वक्ताओं ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों की तकनीकी विशेषज्ञता और किसानों के व्यावहारिक अनुभव के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की जा सकती है। किसानों को बदलते मौसम, बाजार की मांग और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
आत्मा, मधुबनी के अधिकारियों ने बताया कि किसानों को कृषि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का अवसर उपलब्ध कराने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम आगे भी आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर किसानों की समस्याओं का त्वरित, वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधान उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही किसानों ने वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनी खेती में अपनाकर उत्पादन और आमदनी बढ़ाने का संकल्प लिया।
Reviewed by PSA Live News
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7:57:00 am
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