देश के 100 चयनित जिलों में मधुबनी को मिला सातवां स्थान, संयुक्त सचिव ने डीएम एवं टीम को दी बधाई
मधुबनी, 12 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते मधुबनी जिले में कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को नई गति मिल रही है। देशभर के 100 चयनित जिलों में मधुबनी ने सातवां स्थान हासिल कर जिले के कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। बिहार के चयनित सात जिलों में मधुबनी के अलावा दरभंगा, बांका, गया, सिवान, किशनगंज और नवादा शामिल हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव-सह-मुख्य नोडल पदाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में योजना की समीक्षा बैठक हुई। उपलब्धि के लिए उन्होंने जिलाधिकारी आनंद शर्मा एवं उनकी पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं। जिलाधिकारी ने जिले में योजना की लगातार मॉनिटरिंग एवं प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से मधुबनी को देश में नंबर वन बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
उत्पादकता और फसल विविधीकरण पर विशेष जोर
बैठक में जिलाधिकारी ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से योजना के विभिन्न सूचकांकों पर जिले में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। समीक्षा में सामने आया कि जिले में एफपीओ की संख्या, उत्पादक कंपनियों का विस्तार तथा प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों की बढ़ती भागीदारी ने मधुबनी के प्रदर्शन को मजबूत किया है।
योजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने, टिकाऊ एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, फसल कटाई के बाद भंडारण एवं प्रसंस्करण की व्यवस्था मजबूत करने तथा किसानों को कृषि ऋण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा
बैठक में बताया गया कि किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग एवं प्राकृतिक खेती के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों की संख्या 1,875 से बढ़कर 2,375 हो गई है। उर्वरक के संतुलित उपयोग के लिए फर्टिलाइजर एप के प्रति किसानों एवं उर्वरक विक्रेताओं को भी जागरूक किया जा रहा है।
जिले में स्थापित 23 एफपीओ को किसानों की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज तथा बाजार आधारित फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। किसानों को सफल प्रगतिशील किसानों के खेतों का भ्रमण कराने तथा किसान पाठशालाओं के माध्यम से आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया।
मखाना, मत्स्य पालन और मक्का बने प्रमुख अवसर
जिलाधिकारी ने मधुबनी की प्रमुख कृषि चुनौतियों में जलजमाव और सीमित सिंचाई को रेखांकित किया। वहीं मखाना उत्पादन, मत्स्य पालन, मक्का का रकबा बढ़ाने और फसल विविधीकरण को जिले के लिए प्रमुख अवसर बताया।
मत्स्य विभाग की ओर से बताया गया कि जिले में 11 स्थानों पर कुल 427.5 एकड़ चौर क्षेत्र विकसित किया गया है। मखाना एवं मछली उत्पादन से संबंधित विस्तृत सर्वेक्षण कर आंकड़े तैयार करने तथा कार्यप्रणाली का अध्ययन करने का निर्देश दिया गया।
केसीसी से अधिक किसानों को जोड़ने का लक्ष्य
किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का लाभ दिलाने के लिए बैंकों को सक्रियता से कार्य करने का निर्देश दिया गया। अगले दो महीनों में विशेष शिविर लगाकर इच्छुक किसानों को नियमानुसार केसीसी से जोड़ने और इसकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत अरहर उत्पादक किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण कराने के लिए भी व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
जलकुंभी से ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की पहल
जलजमाव वाले क्षेत्रों में जलकुंभी की समस्या को अवसर में बदलने के लिए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में अध्ययन कराने का निर्णय लिया गया। कृषि विज्ञान केंद्र, सुखैत में जलकुंभी से बायो-कम्पोस्ट तैयार करने पर अनुसंधान किया जा रहा है। इसके प्रमाणीकरण एवं बड़े स्तर पर उपयोग से पहले संबंधित विशेषज्ञों की टीम को अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
मुख्य नोडल पदाधिकारी ने किसानों के लिए नई एवं उपयोगी तकनीकों की व्यवहारिकता की जांच, प्रमाणीकरण तथा उनके व्यापक उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र नवीन तकनीकों के प्रदर्शन एवं वैलिडेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बैठक में उप विकास आयुक्त, जिला कृषि पदाधिकारी, उप निदेशक कृषि अभियंत्रण-सह-नोडल पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, अग्रणी बैंक प्रबंधक एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। किसानों ने भी बैठक में अपने अनुभव साझा करते हुए सुझाव एवं फीडबैक दिए।
Reviewed by PSA Live News
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7:42:00 pm
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