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राँची में आदिवासी संगठनों की बैठक, कुड़मी/कुरमी जाति की एसटी मांग पर उठे तीखे सवाल


राँची । 
राजधानी राँची स्थित नगड़ा टोली सरना भवन में आज एक आवश्यक बैठक आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा कुड़मी/कुरमी समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जा पाने की मांग और उससे जुड़े आंदोलन रहे।

बैठक में वक्ताओं ने साफ़ कहा कि कुड़मी/कुरमी समुदाय की यह मांग “मूल आदिवासियों को हाशिए पर धकेलने की एक राजनीतिक साज़िश” है। संगठनों का आरोप है कि यह आंदोलन सिर्फ़ झारखंड ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में भी सामाजिक एकता को तोड़ने और आदिवासी अधिकारों पर कब्जा करने की रणनीति का हिस्सा है।

आदिवासी संगठनों के आरोप

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कुड़मी/कुरमी समुदाय मूल आदिवासी नहीं बल्कि एक संपन्न ओबीसी वर्ग है। उनकी एसटी मांग असली आदिवासियों के संवैधानिक हक—राजनीतिक प्रतिनिधित्व, 26% आरक्षण, नौकरियां, ज़मीन और सांस्कृतिक विरासत—को हथियाने की कोशिश है।

वक्ताओं ने सवाल उठाया कि—

  • जब ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (2004) और केंद्र की मानव जाति विज्ञान रिपोर्ट (2015) ने स्पष्ट रूप से कुड़मी/कुरमी को आदिवासी मानने से इंकार कर दिया, तब भी राजनीतिक दल क्यों इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं?
  • कुड़मी/कुरमी नेताओं का पेसा कानून और सीएनटी एक्ट जैसे आदिवासी अधिकारों वाले क़ानूनों का विरोध क्यों है?
  • रांची बुटी मोड़ में शिवाजी की मूर्ति लगाकर मराठी मूल का दावा क्यों किया गया?
  • आदिवासियों की ज़मीन, भाषा और सरना धर्म बचाने के आंदोलनों में उनकी भूमिका क्यों नहीं दिखती?

आदिवासी संगठनों का कहना है कि भाजपा, कांग्रेस और झामुमो—तीनों ही दल इस आंदोलन को परोक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं, ताकि जनता का ध्यान भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे वास्तविक मुद्दों से भटकाया जा सके।

आंदोलन और राजनीतिक साज़िश का आरोप

पश्चिम बंगाल के जंगलमहल में टीएमसी और भाजपा से जुड़े कुड़मी नेता, जबकि झारखंड में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के अध्यक्ष जयराम कुमार महतो इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं।
संगठनों ने जयराम महतो के बयान “आरक्षण नहीं, संरक्षण चाहते हैं” को भ्रामक बताते हुए कहा कि यह दरअसल “संरक्षण नहीं, डोमिनेशन का खेल” है।

इतिहास का हवाला देते हुए वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू जैसे आदिवासी आंदोलनकारियों के संघर्षों में कुड़मी/कुरमी की कोई भूमिका नहीं रही। इसके बावजूद ये समुदाय इतिहास में अपने नाम को जोड़ने के लिए चुआड़ विद्रोह (रघुनाथ महतो), संथाल विद्रोह (चानकु महतो) और कोल विद्रोह (बुली महतो) जैसे उदाहरणों का दुरुपयोग कर रहा है।

वैज्ञानिक आधार पर जांच की मांग

बैठक में यह भी कहा गया कि इस विवाद का समाधान राजनीति नहीं बल्कि विज्ञान से होना चाहिए।

  • मौजूदा संवैधानिक ढांचा (अनुच्छेद 342) और लोकुर समिति के पुराने मानदंड आज के समय में अपर्याप्त हैं।
  • कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के 2024 के जेनेटिक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया कि भारत के प्राचीन शिकारी-संग्रहकर्ता समूहों की आनुवंशिक संरचना आदिवासियों से मेल खाती है, लेकिन कुड़मी/कुरमी की जेनेटिक उत्पत्ति मुंडा, संथाल और उरांव जैसे आदिवासियों से मेल नहीं खाती।

संगठनों ने भारत सरकार से मांग की कि 233 जातियों की लंबित एसटी मांगों पर एक स्वतंत्र वैज्ञानिक पैनल गठित किया जाए, जिसमें डीएनए रिसर्च, सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण और सांस्कृतिक विश्लेषण को आधार बनाया जाए।

रेल रोको आंदोलन पर कड़ी नाराज़गी

आदिवासी संगठनों ने कुड़मी/कुरमी समुदाय के हालिया रेल रोको और रेल टेका कार्यक्रमों को “असंवैधानिक और जनविरोधी” बताया। उन्होंने कहा कि इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ और आम यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि भारत सरकार और रेलवे विभाग ने इस पर कार्रवाई नहीं की तो यह मानना पड़ेगा कि आंदोलन सत्ता संरक्षित है।

बैठक में शामिल लोग

बैठक में प्रमुख रूप से लक्ष्मीनारायण मुंडा, निरंजना हेरेंज टोप्पो, कुंदरसी मुंडा, फूलचंद तिर्की, डब्लू मुंडा, निशा भगत, लक्ष्मी कुमारी, आनन्द सिंह मुंडा, एन.जी.ओ. बिरसा मुंडा के वंशज बुधराम मुंडा, अमर तिर्की, सरदार राहुल तिर्की, संदीप तिर्की, आकाश तिर्की, हर्षिता मुंडा, राकेश बड़ाईक, राजेश लिंडा, सुमित तिर्की, नयन गोपाल सिंह, अमित टोप्पो, रविंद्र बिन्हा, प्रकाश मुंडा, अनिल मुंडा, खुशबू नायक, राहुल तिर्की सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

राँची में आदिवासी संगठनों की बैठक, कुड़मी/कुरमी जाति की एसटी मांग पर उठे तीखे सवाल राँची में आदिवासी संगठनों की बैठक, कुड़मी/कुरमी जाति की एसटी मांग पर उठे तीखे सवाल Reviewed by PSA Live News on 7:26:00 pm Rating: 5

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