पटना साहिब में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 359वें प्रकाश पर्व पर भव्य नगर कीर्तन, रांची से श्रद्धालुओं का जत्था हुआ शामिल
पटना। सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 359वें प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर आज शुक्रवार 26 दिसंबर को तख्त श्री हरिमंदिर साहिब, पटना साहिब में भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक और धार्मिक नगर कीर्तन में झारखंड की राजधानी रांची से गए श्रद्धालुओं का जत्था भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ शामिल हुआ।
रांची के कृष्णा नगर कॉलोनी, रातू रोड से गए श्रद्धालु गुरु नानक सत्संग सभा से संबद्ध थे। जत्थे में शामिल कीर्तन मंडली ने नगर कीर्तन के दौरान मधुर शबद गायन कर संगत को भाव-विभोर कर दिया। कीर्तन मंडली में शीतल मुंजाल, नीता मिड्ढा, मंजीत कौर, रेशमा गिरधर, इंदर मिड्ढा, रमेश पपनेजा एवं सुरजीत मुंजाल शामिल रहे।
उन्होंने “वाहो वाहो गोविंद सिंह आपे चेला…”, “चलो सिंहो दर्शन करिए गुरु गोबिंद सिंह आए ने…”, “अवचल नगर गुरु गोविंद का नाम जपत सुख पाया राम…” सहित अनेक पवित्र शबदों का गायन किया।
भव्य नगर कीर्तन की शुरुआत दोपहर 2:30 बजे गुरुद्वारा गायघाट से हुई। पुष्पों से सुसज्जित पालकी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को विराजमान किया गया। पंच प्यारे एवं पांच निशानचियों की अगुवाई में नगर कीर्तन अशोक राजपथ होते हुए पश्चिम दरवाजा, गुरहट्टा, खाजेकलां, मच्छरहट्टा, चौक और झाऊगंज से गुजरते हुए देर शाम तख्त श्री हरिमंदिर साहिब, पटना साहिब पहुंचा।
नगर कीर्तन में देश के विभिन्न गुरुद्वारों और राज्यों से आई कीर्तन मंडलियों के साथ-साथ हाथी, घोड़े, ऊंट, बैंड-बाजा, गतका पार्टी, निहंग समूह, स्कूली बच्चे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे मार्ग में पटना शहर की विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा साध संगत के लिए चाय, नाश्ता एवं मिष्ठान्न प्रसाद की सेवा की गई। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर नगर कीर्तन का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया।
गुरु नानक सत्संग सभा के मीडिया प्रभारी नरेश पपनेजा ने बताया कि प्रकाश पर्व के अवसर पर तख्त श्री हरिमंदिर साहिब, पटना साहिब में शनिवार 27 दिसंबर की रात रैन सवाई दीवान सजेगा। इस दौरान प्रकाश पर्व के उपलक्ष में रखे गए श्री अखंड पाठ साहिब का भोग रात्रि 12:30 बजे संपन्न होगा। रांची से गई संगत इस दीवान में शामिल होगी तथा लंगर एवं अन्य सेवाओं में सक्रिय रूप से अपना योगदान देगी।
यह पावन आयोजन सिख इतिहास, संस्कृति और गुरु परंपरा के गौरवशाली स्वरूप को दर्शाने के साथ-साथ आपसी भाईचारे और सेवा भाव का जीवंत उदाहरण बना।
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10:08:00 pm
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