ब्लॉग खोजें

राँची में मनाया गया शांति दिवस : ब्रह्मा बाबा की आध्यात्मिक विरासत ने जगाई नई आशा

 


राँची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा के स्मृति दिवस के पूर्व सप्ताह के उपलक्ष्य में आज स्थानीय सेवा केन्द्र — चौधरी बगान, हरित भवन के सामने, हरमू रोड, राँची में शांति दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में साधक, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आध्यात्मिक तृप्ति का अनुभव : दीपक प्रकाश

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा कि यहाँ आकर वे आध्यात्मिक रूप से स्वयं को तृप्त महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1937 में प्रारंभ हुई यह आध्यात्मिक यात्रा आज 140 से अधिक देशों में फैल चुकी है तथा यह संस्था संयुक्त राष्ट्र संगठन से भी मान्यता प्राप्त है। समाज में व्याप्त अनैतिकता और मूल्य-बोध के संकट के समय ब्रह्मा बाबा ने आध्यात्मिक चेतना की क्रांति का संदेश देकर मानवता को नई दिशा प्रदान की।

उन्होंने कहा कि ब्रह्मा बाबा ने आत्मबोध और नैतिक मूल्यों के माध्यम से मानव को अपने जीवन का अंधकार मिटाने की राह दिखाई। दिग्भ्रमित आत्माओं को सही मार्ग दिखाने वाले पिताश्री ब्रह्मा आज भी आशा के प्रकाश-पुंज के रूप में हमारे बीच उपस्थित हैं।

स्वर्णिम युग की स्थापना का आह्वान

रमन बोड़ा, उपाध्यक्ष, मारवाड़ी सहायक समिति ने कहा कि पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने स्वर्णिम युग के सृजन के लिए मातृशक्ति को सक्रिय होने का आवाहन किया। एकरस, गहन योग-तपस्या के कारण वे आध्यात्मिक शक्ति के अद्भुत स्रोत बन गए थे। उनकी शिक्षाएँ आज भी मनोविकारों पर विजय प्राप्त कर दिव्य जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।

“अशांति के बीच आशा का केन्द्र”

कुमार राजा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब पूरी दुनिया अशांति से जूझ रही है, ऐसे समय में इस संस्था की शिक्षाएँ देश में अमन और चैन का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। यहाँ आकर उन्हें भीतर शांति और उम्मीद का नया संचार महसूस हुआ।

शिक्षाविदों और समाजसेवियों की सार्थक उपस्थिति

हाई स्कूल हटिया के प्राचार्य हीराकांत झा ने कहा कि कार्यक्रम में प्रस्तुत नृत्य-नाटिका अत्यंत प्रभावी रही और इससे जीवन-मूल्यों के प्रति आंतरिक जागरूकता बढ़ती है।

एसबीआई प्रबंधक निखिल कुमार ने कहा कि यहाँ आकर उन्होंने जीवन के सत्य मर्म को समझा। सांसारिक सुख क्षणभंगुर हैं, इसलिए मानव को ईश्वरीय कार्यों में योगदान देना चाहिए।

समाजसेवी मुकेश काबरा ने कहा कि इस संस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ गृहस्थ जीवन छोड़ने का उपदेश नहीं दिया जाता, बल्कि सांसारिक जिम्मेदारियों के साथ आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी जाती है।

ब्रह्मा बाबा की विरासत : स्वर्णिम विश्व व्यवस्था का संकल्प

केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने अपने प्रवचन में कहा कि वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्मा के माध्यम से शिव ने स्वर्णिम युग का सूत्रपात किया। उन्होंने ऐसी विश्वव्यवस्था की नींव रखी जिसमें समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि होगी। पाँच विकारों के कारण नैतिकता का ह्रास हुआ है, किंतु ब्रह्मा बाबा द्वारा स्थापित ब्रह्माकुमारी संस्थान आज विशाल वटवृक्ष बनकर पाँचों महाद्वीपों में शांति का संदेश फहरा रहा है।

ध्यान, नृत्य-नाटिका और ब्रह्माभोजन

कार्यक्रम की शुरुआत गाइडेड मेडिटेशन के साथ हुई। इसके बाद नृत्य-गान और नृत्य-नाटिका के माध्यम से ब्रह्मा बाबा के जीवन, तपस्या और शिक्षाओं का भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण किया गया। अंत में ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने आगंतुकों को परमात्मा का आशीर्वचन एवं शांति संदेश दिया तथा ब्रह्माभोजन का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के अंत में यह भी बताया गया कि चौधरी बगान स्थित ब्रह्माकुमारी केंद्र पर प्रतिदिन ज्ञान-योग सत्र नियमित रूप से उपलब्ध हैं, जहाँ सभी इच्छुक व्यक्ति आकर आध्यात्मिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।

राँची में मनाया गया शांति दिवस : ब्रह्मा बाबा की आध्यात्मिक विरासत ने जगाई नई आशा राँची में मनाया गया शांति दिवस : ब्रह्मा बाबा की आध्यात्मिक विरासत ने जगाई नई आशा Reviewed by PSA Live News on 3:27:00 pm Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.