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युवा दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में चरित्र, संस्कार और आत्मबल पर दिया गया जोर


 राँची
। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थानीय शाखा, चौधरी बगान, हरमू रोड राँची में युवा दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका के प्रति जागरूक करने, स्वच्छता, त्याग, श्रेष्ठ संस्कार और आत्मबल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति उगते हुए सूरज के समान है, जो अपनी लालिमा और तेज से पूरे संसार को प्रकाशमान करती है। जिस प्रकार सूर्य अंधकार दूर कर जगत को ऊर्जा देता है, उसी प्रकार युवा भी समाज, देश और विश्व के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास अपार ऊर्जा, उत्साह और तेज है, किंतु उसके साथ-साथ उनके कंधों पर बड़ी जिम्मेदारियाँ भी हैं। त्याग, अनुशासन, स्वच्छता और नैतिकता को जीवन का आधार बनाकर ही युवा वास्तविक रूप से समाज का नेतृत्व कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि त्याग से ही वास्तविक भाग्य का निर्माण होता है। त्यागी जीवन ही सर्वश्रेष्ठ जीवन है और स्वच्छ जीवन ही सफलता का आधार है। वर्तमान समय में युवा शक्ति का सही दिशा में उपयोग होना अत्यावश्यक है।

कार्यक्रम में उपस्थित रांची विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक रोबिन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि जब तक संस्कारों में क्रांति नहीं होगी, तब तक विचारों और कर्मों में क्रांति नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि लोग यह मान लेते हैं कि संस्कार परिवर्तन असंभव है, किंतु यह मान्यता गलत है। संस्कारों का प्रभाव मनुष्य के मन, बुद्धि और संपूर्ण व्यक्तित्व पर पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कार केवल एक जन्म के नहीं, बल्कि अनेक जन्मों के कर्मों के प्रभावों का संग्रह होते हैं, जो मृत्यु के उपरांत भी आत्मा में सुरक्षित रहते हैं। इन्हीं संस्कारों के आधार पर व्यक्ति की सोच, दृष्टिकोण और व्यवहार बनता है। चरित्र निर्माण के लिए संस्कारों का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।

ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने अपने संदेश में युवाओं को पुरानी नकारात्मक आदतों को छोड़कर नए और सकारात्मक जीवन की शुरुआत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज, राष्ट्र और विश्व को खुशहाल और समृद्ध बनाने के लिए युवाओं का स्वभाव, दृष्टिकोण और विचारधारा सकारात्मक होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि केवल शारीरिक शक्ति ही नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति और आत्मबल का विकास भी अत्यंत आवश्यक है। शरीर बल बढ़ाने के साधन तो बहुत हैं, परंतु आत्मबल का महत्व अक्सर अनजाना रह जाता है, जबकि आत्मबल ही वास्तविक शक्ति है।

निर्मला बहन ने कहा कि श्रेष्ठ विचार और श्रेष्ठ कर्म ही सच्चरित्रता के लक्षण हैं, और सच्चरित्रता ही राष्ट्र और समाज की सबसे बड़ी पूँजी है। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की सबसे बड़ी समस्या “चरित्र की महंगाई” है। यदि युवक पहले चरित्र की महंगाई को दूर कर दें, तो अन्य सभी महंगाइयाँ स्वतः समाप्त हो सकती हैं और सुखी व समृद्ध समाज की स्थापना संभव हो सकती है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवक-युवतियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्यों ने भाग लिया। अंत में युवाओं को नशामुक्ति, स्वच्छता, सकारात्मक सोच और आत्म-सुधार का संकल्प भी दिलाया गया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ और शुभकामनाओं के साथ किया गया।

युवा दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में चरित्र, संस्कार और आत्मबल पर दिया गया जोर युवा दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में चरित्र, संस्कार और आत्मबल पर दिया गया जोर Reviewed by PSA Live News on 4:21:00 pm Rating: 5

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