कानपुर। स्मार्ट सिटी का तमगा पाने वाला कानपुर आज बदहाली और गंदगी के बोझ तले दबता नजर आ रहा है। नगर निगम विभाग में फैले भ्रष्टाचार, अधिकारियों की मनमानी और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता ने शहर की तस्वीर को बदतर बना दिया है। सड़कों पर फैला कूड़ा, नालों में जमी गंदगी और हर तरफ उठती दुर्गंध ने आम नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है।
शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। हाल ही में ठेके पर कराई गई सफाई के नाम पर निकला कूड़ा पुलों और नहरों के किनारे डाल दिया गया, जिससे वातावरण और अधिक दूषित हो गया है। यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि मच्छर, कीड़े और संक्रमण फैलने की बड़ी वजह भी बन चुका है।
नगर निगम में एकछत्र राज चलाने का आरोप झेल रहीं महापौर प्रमिला पांडेय ने शहर में बढ़ती गंदगी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। वहीं क्षेत्रीय विधायक भी अपने विधानसभा क्षेत्र में फैली अव्यवस्थाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं। सीटीआई नहर की दुर्दशा पर छठ पूजा के दौरान औपचारिक सफाई तो कराई गई, लेकिन उसके बाद घाटों की हालत पहले से भी बदतर हो चुकी है।
लगातार दो कार्यकाल से सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उन्होंने शहर को बदबू और कूड़े के ढेर में तब्दील क्यों होने दिया। भ्रष्ट अधिकारियों पर न कोई सख्त कार्रवाई हुई और न ही किसी तरह का जनआंदोलन खड़ा किया गया। हर तरफ समझौते और चुप्पी की राजनीति नजर आ रही है।
भयानक बदबू के बीच जीने को मजबूर शहरवासी अब खुलकर सवाल कर रहे हैं—क्या यही स्मार्ट सिटी है? क्या विकास का मतलब सिर्फ पोस्टरों और नारों तक सीमित रह गया है?
भ्रष्टाचार और सत्ता की चुप्पी ने कानपुर को गंदगी के नरक में धकेल दिया है। अगर अब भी जिम्मेदारों ने आंखें नहीं खोलीं, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
Reviewed by PSA Live News
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12:26:00 pm
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