"जमकर बरसीं आयशा सिंह! वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने उठाए सवाल, 93 लाख की सड़क योजना पर छिड़ा नया विवाद"
पलामू में विवादित छवि वाले व्यक्ति के नाम पर सड़क निर्माण योजना की स्वीकृति पर मंत्री ने जताई आपत्ति, उपायुक्त को समीक्षा कर नाम बदलने का दिया निर्देश
मेदिनीनगर/रांची। पलामू जिले में 93 लाख रुपये की सड़क निर्माण योजना को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर खुलकर सामने आए हैं और मेदिनीनगर नगर निगम द्वारा एक सड़क योजना को डब्ल्यू सिंह के नाम से प्रशासनिक स्वीकृति दिए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। मंत्री के बयान के बाद यह मामला अब केवल एक विकास योजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी योजनाओं के नामकरण और उनके सामाजिक संदेश को लेकर बहस का विषय बन गया है।
इस मुद्दे पर भाजपा नेता आयशा सिंह ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से संचालित योजनाओं का नामकरण ऐसे व्यक्तियों के नाम पर किया जाना, जिनकी छवि विवादों में रही हो, समाज के लिए गलत उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों के दर्ज होने की बातें सामने आती रही हैं, तो उसके नाम पर सरकारी योजना की प्रशासनिक स्वीकृति देना उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि सरकार की प्राथमिकता अपराध और उग्रवाद मुक्त समाज का निर्माण करना है। ऐसे में विवादित व्यक्तियों के नाम पर योजनाओं का संचालन सरकार के मूल उद्देश्यों को कमजोर कर सकता है।
मंत्री ने पलामू के उपायुक्त को पूरे मामले की समीक्षा करने तथा तथ्यों की जांच के बाद आवश्यकता पड़ने पर योजना का नाम बदलने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक होती हैं और उनका नामकरण ऐसे व्यक्तित्वों के नाम पर होना चाहिए, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत हों।
जानकारी के अनुसार, मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में लगभग 93 लाख रुपये की लागत से बनने वाली सड़क योजना को लेकर प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई थी। स्वीकृति पत्र में डब्ल्यू सिंह का नाम शामिल होने के बाद स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक सड़क योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस व्यापक सवाल को जन्म देता है कि सरकारी योजनाओं के नाम तय करने के लिए क्या कोई स्पष्ट मानक होने चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की सार्वजनिक छवि विवादित हो, तो क्या उसके नाम पर सरकारी परियोजनाओं का नामकरण उचित है? यह बहस अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर आम लोगों के बीच भी पहुंच चुकी है।
फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन की समीक्षा रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में मंत्री की आपत्तियां सही पाई जाती हैं, तो न केवल योजना का नाम बदला जा सकता है, बल्कि इस तरह की स्वीकृतियों की प्रक्रिया पर भी नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला झारखंड की राजनीति में और अधिक तूल पकड़ सकता है।
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