935वें खिचड़ी भंडारे में उमड़ा आस्था का सैलाब, डेढ़ हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद
तिरुपति बालाजी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजन और भव्य महाआरती के बीच संपन्न हुआ धार्मिक आयोजन
रांची। राजधानी रांची स्थित दिव्य देशम श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में शनिवार को अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि एवं सर्वार्थ अमृत सिद्धियोग के पावन संयोग में आयोजित 935वें खिचड़ी भंडारे ने श्रद्धा, भक्ति और सनातन परंपराओं की अनुपम छटा बिखेर दी। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और पूरा वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन तथा भगवान के जयघोष से भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर लगभग 1532 श्रद्धालुओं ने खिचड़ी महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में सेवा, समर्पण और सामूहिक सहभागिता की सनातन परंपरा को भी सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित रही और सभी भक्तों ने अनुशासन के साथ भगवान के दर्शन कर महाप्रसाद ग्रहण किया।
प्रातःकालीन अनुष्ठानों से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकालीन धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। मंदिर के अर्चकों द्वारा भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर का विश्वरूप दर्शन, सुप्रभातम एवं नित्याराधना विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराया गया। पूजन के दौरान वेद, उपनिषद और श्रीसम्प्रदाय के आचार्य भगवद् रामानुजाचार्य के सिद्धांतों पर आधारित चुनिंदा मंत्रों का उच्चारण किया गया तथा पारंपरिक वैष्णव रीति-रिवाजों का पूर्णतः पालन करते हुए विशेष आराधनम् एवं वंदनम् किया गया।
अनुष्ठानों के दौरान भक्तों ने अत्यंत श्रद्धा के साथ भगवान श्रीहरि वेंकटेश्वर के दर्शन किए। वैदिक मंत्रों की गूंज और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि से मंदिर परिसर का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।
भगवान श्रीहरि के साथ श्रीदेवी, भूमिदेवी और सुदर्शन चक्र की विशेष आराधना
पूजन-अर्चन के क्रम में भक्तों के संकटों का नाश करने वाले भगवान श्रीहरि वेंकटेश्वर के साथ जगत जननी श्रीश्रीदेवी लक्ष्मी, श्रीभूमिदेवी लक्ष्मी एवं चक्रराज सुदर्शन की विशेष आराधना की गई। विभिन्न वैदिक स्तोत्रों एवं स्तुतियों के माध्यम से देव विग्रहों का गुणगान कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास किया गया।
इसके पश्चात भव्य महा आरती संपन्न हुई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर भगवान की आराधना की। आरती के दौरान मंदिर परिसर "गोविंदा-गोविंदा" के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
विधिवत अर्पित किया गया खिचड़ी महाप्रसाद
महा आरती के उपरांत भगवान को घंटा-घड़ियाल बजाते हुए जल से प्रोक्षण किया गया तथा परंपरानुसार पर्दे के भीतर विभिन्न मुद्राओं का प्रदर्शन करते हुए खिचड़ी महाप्रसाद का भोग अर्पित किया गया। भोग अर्पण के पश्चात महाप्रसाद वितरण का क्रम प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार इस बार के भंडारे में कुल 1532 श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया, जो इस धार्मिक आयोजन के प्रति लोगों की गहरी आस्था और विश्वास का प्रमाण है।
तीन परिवार बने आयोजन के यजमान
इस पावन खिचड़ी भंडारे के यजमान के रूप में रांची निवासी श्री विकास शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रुचिता शर्मा, श्री अंकित शर्मा तथा श्री गौरी शंकर साबू एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मंजूलता साबू ने अपनी सहभागिता निभाई। यजमान परिवारों ने भगवान से समस्त मानव समाज के कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
अर्चकों ने संपन्न कराए सभी धार्मिक अनुष्ठान
दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों को मंदिर के अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं श्री नारायण दास जी ने वैदिक परंपराओं के अनुरूप विधिवत संपन्न कराया। उनके मार्गदर्शन में सभी पूजन-विधियां शास्त्रोक्त तरीके से पूरी की गईं।
सामाजिक सहभागिता ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में समाज के अनेक गणमान्य लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। प्रमुख रूप से श्री राम अवतार नारसरिया, श्री राजेश सुल्तानिया, श्री प्रदीप नारसरिया, श्री अनूप अग्रवाल, श्री रंजन सिंह, श्री सुशील लोहिया, श्री अनीष अग्रवाल, श्री आशीष अग्रवाल, श्री सुशील गाड़ोदिया, श्री सुशील पोद्दार, श्री शम्भुनाथ पोद्दार एवं श्री प्रभाष मित्तल सहित अन्य श्रद्धालुओं का विशेष योगदान रहा।
सनातन संस्कृति में सेवा और समरसता का प्रतीक है खिचड़ी भंडारा
तिरुपति बालाजी मंदिर में वर्षों से आयोजित हो रहा यह खिचड़ी भंडारा केवल प्रसाद वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की उस महान परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जिसमें सेवा, समर्पण, समानता और लोकमंगल की भावना सर्वोपरि होती है। यहां जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर सभी श्रद्धालु एक साथ बैठकर महाप्रसाद ग्रहण करते हैं, जो सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत संदेश देता है।
935वें खिचड़ी भंडारे का यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया। भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर की कृपा प्राप्त करने के साथ-साथ भक्तों ने सेवा और सद्भाव की उस परंपरा को भी आत्मसात किया, जो हिंदुस्तान की सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
Reviewed by PSA Live News
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7:44:00 pm
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