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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर बाल श्रम उन्मूलन की गूंज

"हर बच्चे को मिले शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण बचपन का अधिकार" : जिलाधिकारी आनंद शर्मा

अपर समाहर्ता संतोष कुमार ने अधिकारियों-कर्मियों को दिलाई बाल श्रम उन्मूलन की शपथ, बाल अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का लिया संकल्प

 

मधुबनी, 12 जून 2026। 
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर समाहरणालय, मधुबनी परिसर में बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों के अधिकारों के संरक्षण तथा उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक बचपन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में बाल श्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्रत्येक नागरिक को इस सामाजिक बुराई के विरुद्ध अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराना था।

इस अवसर पर अपर समाहर्ता (आपदा) संतोष कुमार ने समाहरणालय के अधिकारियों एवं कर्मियों को बाल श्रम उन्मूलन की शपथ दिलाई। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से आह्वान किया कि वे न केवल स्वयं बाल श्रम का विरोध करें, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

शपथ के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने संकल्प लिया कि वे किसी भी रूप में बाल श्रम का समर्थन नहीं करेंगे और न ही किसी बच्चे से श्रम कार्य कराए जाने को बढ़ावा देंगे। उन्होंने यह भी प्रतिज्ञा की कि 14 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे से मजदूरी या श्रम कार्य नहीं कराया जाएगा तथा यदि कहीं बाल श्रम की सूचना प्राप्त होती है तो संबंधित प्रशासनिक तंत्र को अवगत कराते हुए उसके उन्मूलन के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान यह भी संकल्प लिया गया कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं तथा सम्मानपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाएगा। अधिकारियों ने माना कि बाल श्रम केवल कानूनी अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर विषय है, जिसका समाधान समाज के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि "प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण बचपन का अधिकार प्राप्त है। यह केवल संवैधानिक दायित्व नहीं, बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य भी है कि हम बच्चों को श्रम की बेड़ियों से मुक्त कर उनके सपनों को उड़ान देने का अवसर प्रदान करें।"

उन्होंने कहा कि गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक असमानता के कारण अनेक बच्चे आज भी बाल श्रम के लिए विवश हैं। ऐसे बच्चों को विद्यालयों तक पहुंचाना, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना तथा उनके परिवारों को जागरूक करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति बाल श्रम के विरुद्ध आवाज उठाए और किसी भी बच्चे को मजदूरी करते देखकर संबंधित विभाग को सूचना दे, तो बाल श्रम उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के बचपन, शिक्षा और उनके समग्र विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इससे उनका शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास बाधित होता है। इसलिए आवश्यक है कि व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाकर समाज में यह संदेश पहुंचाया जाए कि बच्चों के हाथों में औजार नहीं, बल्कि किताबें और कलम होनी चाहिए।

उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने बच्चों को शिक्षा से वंचित न करें तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर उन्हें बेहतर भविष्य प्रदान करें। उन्होंने कहा कि बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब प्रशासन, अभिभावक, शिक्षण संस्थान, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर इस दिशा में निरंतर प्रयास करें।

शपथ ग्रहण कार्यक्रम के उपरांत सभी अधिकारियों एवं कर्मियों ने शपथ पत्र भरकर जमा किया तथा बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहेंगे और किसी भी बच्चे के साथ होने वाले शोषण के विरुद्ध आवाज उठाएंगे।

कार्यक्रम में उप निदेशक-सह-जिला जनसंपर्क पदाधिकारी परिमल कुमार, सहायक निदेशक सिम्पा ठाकुर, सामाजिक सुरक्षा शाखा के नितेश पाठक, सहायक आपदा पदाधिकारी रजनीश कुमार सहित समाहरणालय के अन्य पदाधिकारी, कर्मचारी एवं संबंधित व्यक्ति उपस्थित रहे।

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक शपथ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संदेश देने में सफल रहा कि बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक नागरिक इस दिशा में अपनी भूमिका निभाए, तो वह दिन दूर नहीं जब हर बच्चा विद्यालय जाएगा, अपने सपनों को साकार करेगा और बाल श्रम जैसी कुप्रथा इतिहास का हिस्सा बन जाएगी।

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