राँची। नगर के प्रसिद्ध दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में श्रीवैष्णव मतावलंबी श्रद्धालु सोमवार, 24 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा नामक एकादशी का व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ करेंगे। इस पावन अवसर पर मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उद्यास्तमन सेवा एवं महाभिषेक का आयोजन किया जाएगा।
मंदिर से मिली जानकारी के अनुसार, द्वादशी युक्त पुत्रदा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायिनी माना गया है। श्रीवैष्णव परंपरा में इस व्रत का विशेष धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर की आराधना कर व्रत, पूजन एवं विभिन्न अनुष्ठानों में शामिल होंगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत भगवान की प्रसन्नता प्राप्त कराने वाला तथा तपस्वियों के लिए श्रेष्ठ तप के समान माना गया है। यह व्रत सभी वर्णों के लिए पालनीय बताया गया है। शास्त्रीय मान्यता में कहा गया है कि एकादशी तिथि में अन्न, विशेषकर चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
श्रीवैष्णव परंपरा में दशमी विद्धा एकादशी का त्याग कर द्वादशी युक्त एकादशी को व्रत के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यदि एकादशी तिथि का अंश भी द्वादशी में विद्यमान हो तो उसी तिथि में व्रत करना उचित माना जाता है। वहीं, यदि द्वादशी युक्त एकादशी के व्रत के बाद पारण के लिए द्वादशी उपलब्ध न हो, तो त्रयोदशी में पारण करने का विधान बताया गया है।
इस क्रम में मंगलवार, 25 अगस्त को प्रातः 5:42 बजे तक द्वादशी तिथि में पारण किया जा सकेगा। मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर के दर्शन, पूजन और महाभिषेक में बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने की संभावना है।
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7:32:00 am
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