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पेपर लीक की घटनाओं पर सर्वजन विकास पार्टी ने जताई गहरी चिंता

भ्रष्ट भर्ती व्यवस्था प्रतिभावान युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़, अब पूरे सिस्टम में आमूलचूल बदलाव की जरूरत - अशोक कुमार झा।


रांची।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सर्वजन विकास पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार झा ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक अथवा भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि आजादी के बाद से देश में विकसित हुई व्यवस्था की गंभीर कमियों का परिणाम है। आवश्यकता किसी एक परीक्षा अथवा किसी एक राज्य की व्यवस्था पर सवाल उठाने की नहीं, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र को ईमानदार, पारदर्शी और प्रतिभा आधारित बनाने की है।

अशोक कुमार झा ने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वर्षों तक मेहनत करने वाले प्रतिभावान और गरीब परिवारों के बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपनी जवानी लगा देते हैं। वे दिन-रात पढ़ाई करते हैं, अपने परिवार की आर्थिक परिस्थितियों से संघर्ष करते हैं और सरकारी नौकरी को अपने भविष्य का आधार मानकर वर्षों तक तैयारी करते हैं। लेकिन जब परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं और पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो इन युवाओं का केवल एक वर्ष या एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके जीवन का महत्वपूर्ण समय प्रभावित होता है।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा किसी भी प्रतिभावान युवा के लिए समान अवसर का माध्यम होनी चाहिए, न कि धन और पहुंच वालों के लिए अवसर का दरवाजा। यदि किसी व्यवस्था में पैसे, प्रभाव अथवा भ्रष्टाचार के माध्यम से नियुक्ति की संभावना पैदा होती है तो वह व्यवस्था देश की प्रतिभा के साथ सबसे बड़ा अन्याय करती है।

‘गरीब का बच्चा सालों मेहनत करता है, लेकिन व्यवस्था उसका भविष्य छीन लेती है’

अशोक कुमार झा ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं जिनके माता-पिता अपनी सीमित आमदनी से बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। कई युवा गांवों और छोटे शहरों से निकलकर महानगरों में कम साधनों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कोई कमरे का किराया देता है, कोई कोचिंग की फीस जुटाता है, तो कोई पुस्तकें खरीदने के लिए भी संघर्ष करता है।

ऐसे विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में अनियमितता केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि उनके सपनों पर सीधा प्रहार है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई युवा वर्षों तक तैयारी करने के बाद परीक्षा देता है और बाद में उसे पता चलता है कि प्रश्नपत्र लीक हो गया या परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई, तो उसके भीतर व्यवस्था के प्रति विश्वास समाप्त होना स्वाभाविक है।

अशोक कुमार झा ने कहा कि यही कारण है कि आज देश के विभिन्न हिस्सों में युवाओं के बीच असंतोष बढ़ रहा है। यह असंतोष केवल नौकरी पाने का सवाल नहीं है। यह न्यायपूर्ण अवसर, पारदर्शिता और अपने भविष्य की सुरक्षा का सवाल बन चुका है।

‘भ्रष्ट भर्ती व्यवस्था आगे चलकर पूरे शासन तंत्र को प्रभावित करती है’

सर्वजन विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचार की शुरुआत यदि भर्ती प्रक्रिया से होती है तो उसका प्रभाव केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं रहता। यदि किसी पद पर नियुक्ति योग्यता के बजाय धन अथवा प्रभाव के आधार पर होती है, तो उससे पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी पद पर बैठने वाला व्यक्ति जनता के पैसे से वेतन प्राप्त करता है और उसे संविधान एवं कानून के अनुसार जनता की सेवा करनी होती है। इसलिए यह जरूरी है कि उस पद तक पहुंचने वाला व्यक्ति अपनी योग्यता, ईमानदारी और क्षमता के आधार पर चुना जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में लंबे समय से यह धारणा बनी है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए योग्यता के साथ-साथ दूसरी चीजें भी जरूरी हैं। यह धारणा ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है।

अशोक कुमार झा ने कहा कि अगर लोगों का विश्वास ही परीक्षा और भर्ती व्यवस्था से उठ जाएगा, तो आने वाली पीढ़ी मेहनत और प्रतिभा के बजाय दूसरे रास्तों पर विश्वास करने लगेगी। यह स्थिति देश के लिए अत्यंत गंभीर होगी।

‘भ्रष्ट तरीके से हुई नियुक्ति भ्रष्टाचार की नई श्रृंखला को जन्म दे सकती है’

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी पद को पाने के लिए अवैध तरीके से बड़ी रकम खर्च करता है, तो उसके सामने उस रकम की भरपाई का दबाव पैदा होता है। कई मामलों में व्यक्ति परिवार, रिश्तेदारों या साहूकारों से कर्ज लेकर पैसा जुटाता है। नौकरी मिलने के बाद उस कर्ज को चुकाने की मानसिकता उसके ऊपर रहती है।

अशोक कुमार झा ने कहा कि यही कारण है कि भ्रष्ट भर्ती व्यवस्था आगे चलकर भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था को जन्म दे सकती है। एक गलत नियुक्ति कई दूसरी गलतियों का कारण बन सकती है और धीरे-धीरे भ्रष्टाचार एक व्यक्ति की समस्या न रहकर व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को केवल भाषणों से समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए भर्ती से लेकर पदस्थापन, स्थानांतरण, पदोन्नति और प्रशासनिक निर्णयों तक पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना होगा।

‘प्रतिभावान युवा विदेश जा रहे हैं, यह देश के लिए चिंता का विषय’

अशोक कुमार झा ने कहा कि आज भारत के प्रतिभावान युवा विदेशों में जाकर अपनी योग्यता का लोहा मनवा रहे हैं। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों में भारतीय युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि भारतीय प्रतिभाएं विश्व स्तर पर सफलता हासिल कर रही हैं, लेकिन चिंता का विषय यह है कि देश के भीतर उन्हें अपनी प्रतिभा का पर्याप्त उपयोग करने का अवसर क्यों नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि देश की शिक्षा व्यवस्था प्रतिभा पैदा करे और भर्ती व्यवस्था उसी प्रतिभा को अवसर न दे, तो यह राष्ट्रीय क्षति है। जिस प्रतिभा का उपयोग देश के विकास में होना चाहिए, उसका लाभ दूसरे देशों अथवा विदेशी संस्थानों को मिल जाता है।

‘आजादी के 80 वर्ष बाद भी अगर व्यवस्था नहीं बदली तो आत्ममंथन जरूरी’

अशोक कुमार झा ने कहा कि देश को आजाद हुए लगभग 80 वर्ष हो चुके हैं। इसके बावजूद यदि आज भी युवाओं को यह महसूस हो कि उन्हें योग्यता के आधार पर समान अवसर नहीं मिल रहा है, तो यह पूरे समाज और राजनीतिक व्यवस्था के लिए आत्ममंथन का विषय है।

उन्होंने कहा कि देश ने विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, डिजिटल व्यवस्था और अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। लेकिन प्रशासनिक और भर्ती व्यवस्था में यदि पारदर्शिता का अभाव बना रहता है तो विकास का लाभ पूरी तरह समाज तक नहीं पहुंच सकता।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार विकास की राह में दीमक की तरह है। बाहर से व्यवस्था कितनी भी मजबूत दिखाई दे, यदि भीतर से भ्रष्टाचार उसे खोखला करता रहेगा तो देश की विकास यात्रा प्रभावित होती रहेगी।

झारखंड में JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और कथित पेपर लीक एवं अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए अशोक कुमार झा ने कहा कि राज्य के छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। विधानसभा घेराव सहित विभिन्न आंदोलनों के बाद अब छात्रों का आक्रोश मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार को आंदोलनरत छात्रों से संवाद करना चाहिए और उनके सवालों का संतोषजनक उत्तर देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि छात्रों के मन में यदि व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा हो गया है, तो उसे केवल पुलिस, प्रशासन या राजनीतिक बयानबाजी से दूर नहीं किया जा सकता। इसके लिए सरकार को पारदर्शी जांच और ठोस कार्रवाई के माध्यम से विश्वास बहाल करना होगा।

‘भाजपा हो या झामुमो-कांग्रेस, किसी दल को सिस्टम की जिम्मेदारी से भागने का अधिकार नहीं’

अशोक कुमार झा ने कहा कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं को लेकर केवल वर्तमान सरकार को दोषी ठहराना पर्याप्त नहीं है। यह समस्या देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रूपों में दिखाई देती रही है।

उन्होंने कहा कि झारखंड में भाजपा को भी लंबे समय तक सरकार चलाने का अवसर मिला है। झामुमो और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों को भी सत्ता में रहने का अवसर मिला है। इसलिए किसी एक दल को यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का अधिकार नहीं है कि यह समस्या केवल दूसरी सरकार की देन है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल सत्ता में आते-जाते रहते हैं, लेकिन सिस्टम बना रहता है। यदि किसी सरकार को सत्ता में रहते हुए व्यवस्था सुधारने का अवसर मिला और उसने स्थायी सुधार नहीं किया, तो उसे भी आत्ममंथन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश के सामने सवाल यह नहीं होना चाहिए कि किस पार्टी के शासनकाल में कितने मामले सामने आए। वास्तविक सवाल यह होना चाहिए कि ऐसी व्यवस्था कैसे बनाई जाए जिसमें भविष्य में पेपर लीक की गुंजाइश ही न्यूनतम हो।

‘छात्रों ने वह सवाल उठाया है, जो राजनीतिक दलों को उठाना चाहिए था’

सर्वजन विकास पार्टी के संस्थापक ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह युवा अपने भविष्य और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं, वह देश के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।

उन्होंने कहा कि जो सवाल छात्र उठा रहे हैं, उन पर गंभीर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए।

क्या परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है?
क्या प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा केंद्र तक पर्याप्त सुरक्षा है?
क्या परिणाम और चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है?
क्या दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई होती है?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या किसी गरीब और प्रतिभावान विद्यार्थी को बिना किसी प्रभाव या पैसे के केवल अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी मिलने का पूरा भरोसा है?

अशोक कुमार झा ने कहा कि इन सवालों के जवाब केवल सरकार नहीं, बल्कि पूरा समाज मांग रहा है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बोले—‘छात्रों का विश्वास जीतना होगा’

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर अशोक कुमार झा ने कहा कि हेमंत सोरेन स्वयं को आंदोलनकारी परिवार से आने वाला और गरीबों का प्रतिनिधि बताते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता शिबू सोरेन का झारखंड आंदोलन और महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष ऐतिहासिक रहा है और झारखंड की जनता में उन्हें ‘गुरुजी’ के रूप में सम्मान प्राप्त है।

अशोक कुमार झा ने कहा कि ऐसे आंदोलनकारी राजनीतिक विरासत वाले मुख्यमंत्री के सामने आज छात्रों का सीधे इस्तीफे की मांग तक पहुंच जाना गंभीर स्थिति है।

उन्होंने कहा कि छात्रों की ओर से मुख्यमंत्री और सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि मुख्यमंत्री और सरकार को विश्वास है कि उन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं, तो उन्हें जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने में आगे आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच से किसी निर्दोष व्यक्ति को डरने की जरूरत नहीं होती। सरकार यदि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने देती है और जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक करती है, तो इससे छात्रों और जनता का विश्वास मजबूत होगा।

‘CBI जांच की मांग पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए’

अशोक कुमार झा ने कहा कि छात्रों द्वारा यदि किसी केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग की जा रही है तो सरकार को उस मांग को राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जहां भी गंभीर आरोप हों, वहां निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच जरूरी है। जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी साबित करना नहीं, बल्कि सच्चाई को सामने लाना और दोषियों को कानून के दायरे में लाना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार को अपनी पारदर्शिता पर विश्वास है तो उसे छात्रों को विश्वास में लेकर जांच की प्रक्रिया पर स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।

‘मुख्यमंत्री का इस्तीफा ही अंतिम समाधान नहीं’

अशोक कुमार झा ने कहा कि सर्वजन विकास पार्टी छात्रों के आंदोलन और पारदर्शी भर्ती की मांग का समर्थन करती है, लेकिन केवल किसी एक मुख्यमंत्री या मंत्री का इस्तीफा इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि आज किसी सरकार का इस्तीफा हो भी जाए और कल दूसरी सरकार सत्ता में आ जाए, लेकिन वही पुराना भर्ती सिस्टम चलता रहे, तो समस्या फिर पैदा होगी।

इसलिए लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व बदलने के साथ-साथ सिस्टम बदलना जरूरी है। ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिसमें किसी भी सरकार के समय प्रश्नपत्र लीक करना, परीक्षा में धांधली करना या भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करना लगभग असंभव हो।

सर्वजन विकास पार्टी ने सुझाया ‘नया भर्ती सिस्टम’

अशोक कुमार झा ने कहा कि देश में भर्ती परीक्षाओं के लिए एक मजबूत और आधुनिक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल हो, प्रश्नपत्र की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था हो, परीक्षा केंद्रों की स्वतंत्र निगरानी हो और किसी भी शिकायत की जांच के लिए समयबद्ध तंत्र बनाया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

उनके अनुसार, परीक्षा में गड़बड़ी के कारण प्रभावित विद्यार्थियों को केवल अगली परीक्षा की तारीख देकर जिम्मेदारी समाप्त नहीं की जा सकती। उन्हें उनके समय, मेहनत और मानसिक पीड़ा का भी संज्ञान लेना होगा।

उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द करने के बजाय जहां संभव हो, तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से संदिग्ध मामलों की पहचान कर निष्पक्ष समाधान निकालने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि लाखों ईमानदार विद्यार्थियों को बार-बार परीक्षा देने के लिए मजबूर न होना पड़े।

‘राजनेताओं को जो काम करना चाहिए था, वह युवा कर रहे हैं’

अशोक कुमार झा ने कहा कि राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता की समस्याओं का समाधान करें। लेकिन आज युवा खुद अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छात्रों का आंदोलन केवल नौकरी की मांग नहीं है। यह व्यवस्था में विश्वास बहाल करने का आंदोलन बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि यह आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से चलता है तो समाज के सभी वर्गों को युवाओं की बात सुननी चाहिए।

‘सभी राजनीतिक दल दलगत राजनीति से ऊपर उठें’

अशोक कुमार झा ने देश के सभी राजनीतिक दलों और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताओं को लेकर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय स्तर पर विचार किया जाए।

उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग विपक्ष की सरकारों के पुराने मामले गिनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते और विपक्ष को भी केवल राजनीतिक लाभ के लिए छात्रों के आक्रोश का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि युवा किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। वे देश की संपत्ति हैं।

उनकी प्रतिभा का सही उपयोग करना सरकार, समाज और राजनीतिक व्यवस्था की सामूहिक जिम्मेदारी है।

‘नई पीढ़ी ने बदलाव की जरूरत महसूस की है’

अशोक कुमार झा ने कहा कि देश की नई पीढ़ी अब पहले की तुलना में अधिक जागरूक है। वह सवाल पूछ रही है, अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रही है और व्यवस्था में पारदर्शिता चाहती है।

उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है, बशर्ते युवाओं की आवाज को सुना जाए और उनके आंदोलन को सही दिशा में ले जाने का प्रयास किया जाए।

उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, उसमें समान अवसर, न्याय और सम्मान होना चाहिए था। यदि किसी गरीब विद्यार्थी को केवल इसलिए अवसर नहीं मिलता क्योंकि वह भ्रष्ट व्यवस्था में पैसा खर्च नहीं कर सकता, तो यह स्वतंत्रता के मूल उद्देश्य पर प्रश्न खड़ा करता है।

‘असली आजादी तभी पूरी होगी जब अवसर भी समान होगा’

अशोक कुमार झा ने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक न्याय भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के हर युवा को यह विश्वास होना चाहिए कि यदि वह मेहनत करता है, योग्य है और परीक्षा में सफल होता है तो उसे किसी सिफारिश, रिश्वत अथवा प्रभाव की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि यही वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान होगी।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन इसलिए नहीं दिया था कि आने वाली पीढ़ियां भ्रष्टाचार और अन्याय से लड़ती रहें। उनका सपना एक ऐसे राष्ट्र का था जहां कानून का शासन हो और प्रतिभा का सम्मान हो।

‘सर्वजन विकास पार्टी व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई में युवाओं के साथ’

अंत में अशोक कुमार झा ने कहा कि सर्वजन विकास पार्टी किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि पार्टी छात्रों की उन मांगों का समर्थन करती है जिनका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना है। लेकिन पार्टी का उद्देश्य केवल तत्कालीन राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि स्थायी व्यवस्था परिवर्तन है।

उन्होंने कहा—

“हमें ऐसा सिस्टम बनाना होगा जिसमें गरीब का बच्चा भी यह विश्वास लेकर परीक्षा दे सके कि उसकी मेहनत का मूल्य है। उसे यह डर न हो कि किसी पैसे वाले या प्रभावशाली व्यक्ति के कारण उसका भविष्य छिन जाएगा। प्रतिभा को अवसर मिलेगा, योग्यता को सम्मान मिलेगा और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं होगी—तभी हमारा देश वास्तव में विकसित और मजबूत राष्ट्र बनेगा।”

अशोक कुमार झा ने कहा कि अब समय आ गया है कि देश के सभी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन, शिक्षाविद, बुद्धिजीवी, अभिभावक और युवा मिलकर भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाएं।

उन्होंने कहा कि “सरकारें बदलती रहेंगी, लेकिन यदि सिस्टम नहीं बदला तो समस्याएं भी बदलने वाली नहीं हैं। इसलिए अब लड़ाई व्यक्ति बदलने की नहीं, व्यवस्था बदलने की होनी चाहिए।”

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश की नई पीढ़ी इस चुनौती को समझ चुकी है और आने वाले समय में एक ऐसी पारदर्शी, ईमानदार और प्रतिभा आधारित व्यवस्था के निर्माण के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगी, जिसमें किसी विद्यार्थी को अपने अधिकार के लिए वर्षों तक सड़क पर संघर्ष करने की आवश्यकता न पड़े।

— अशोक कुमार झा
संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष
सर्वजन विकास पार्टी

पेपर लीक की घटनाओं पर सर्वजन विकास पार्टी ने जताई गहरी चिंता पेपर लीक की घटनाओं पर सर्वजन विकास पार्टी ने जताई गहरी चिंता Reviewed by PSA Live News on 12:04:00 pm Rating: 5

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