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धरना पर बैठे कर्मचारियों ने बताया कि साल 2010 से लेकर 2025 तक उन्होंने लगातार नगर निगम की बसों को चलाया। इस दौरान उन्होंने शहरवासियों की सेवा की, पर अचानक बसें बंद हो जाने के बाद उन्हें काम से हटा दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि वे न तो किसी अन्य बस में एडजस्ट किए गए और न ही उन्हें कोई वैकल्पिक रोजगार दिया गया।
कर्मचारियों की मांग
धरना दे रहे चालक और स्टाफ ने साफ कहा कि नगर निगम उन्हें रोजगार से वंचित नहीं कर सकता। उनकी मांग है कि या तो उन्हें बाकी चल रही बसों में समायोजित किया जाए या फिर निगम उन्हें किसी अन्य माध्यम से रोजगार मुहैया कराए। उनका कहना है कि बसों के ठप होने का खामियाज़ा निर्दोष कर्मचारियों पर थोपना सरासर अन्याय है।
धरने में आक्रोश झलका
कर्मचारियों ने निगम प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि वे पिछले डेढ़ महीने से बेरोजगार हो गए हैं। परिवार पालना मुश्किल हो गया है। धरने में शामिल कुछ चालकों ने कहा कि निगम प्रबंधन को समस्या का हल निकालना चाहिए, वरना वे अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे।
निगम की चुप्पी पर सवाल
गौरतलब है कि नगर निगम की इन 17 बसों का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण समय पर नहीं हो सका, जिसके कारण ये सड़क पर उतरने लायक नहीं रह गईं। अब सवाल यह उठ रहा है कि निगम की लापरवाही का खामियाज़ा क्यों कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। अभी तक निगम प्रशासन की ओर से इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
शहर के आम नागरिकों का भी कहना है कि इन बसों के बंद होने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर असर पड़ा है। वहीं कर्मचारी लगातार रोजगार को लेकर चिंतित हैं।
Reviewed by PSA Live News
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12:19:00 pm
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