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झारखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती पर सड़कों पर झलकी झारखंडी संस्कृति, “स्ट्रीट डांस” में झूमी राजधानी रांची


रांची, 12 नवम्बर 2025: 
झारखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी रांची आज एक बार फिर अपनी माटी की महक, लोकगीतों की गूंज और पारंपरिक नृत्यों की थिरकन से सराबोर हो उठी। जिला प्रशासन, रांची और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “स्ट्रीट डांस कार्यक्रम” ने पूरे शहर को झारखंडी रंग में रंग दिया।

राज्य सरकार के निर्देशानुसार आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य झारखंड की लोककला, संस्कृति और परंपराओं को आम जनमानस तक पहुँचाना तथा राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती को जनभागीदारी के सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाना था।

दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक रांची की गलियों और चौकों में लोकसंस्कृति की अद्भुत छटा देखने को मिली। शहर के करमटोली चौक, फिरयालाल चौक, राजेन्द्र चौक, बिरसा चौक, धुर्वा गोलचक्कर, धुर्वा बस स्टैंड, एयरपोर्ट क्षेत्र, मोरहाबादी पार्क, समाहरणालय (वेंडर मार्केट के समीप), रांची रेलवे स्टेशन, नामकुम चौक, हटिया (चांदनी चौक) और खेलगांव जैसे प्रमुख स्थलों पर झारखंड की पारंपरिक लोकनृत्य शैलियों की शानदार प्रस्तुतियों ने हर दर्शक का दिल जीत लिया।

ढोल, नगाड़ा, मांदर और झांझ की ताल पर झारखंडी कलाकारों ने नागपुरी, संथाली, हो और कुरुख नृत्य की ऐसी मोहक झलकियां प्रस्तुत कीं, जिससे सड़कें मानो उत्सव स्थल में बदल गईं। कलाकार पारंपरिक परिधानों में सजे, सिर पर पगड़ी और रंग-बिरंगे परिधान झारखंड की सांस्कृतिक विविधता और एकता की सशक्त मिसाल बन गए।

लोगों ने अपने मोबाइल फोनों से झारखंडी लोकधुनों पर थिरकते कलाकारों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए, जिससे रांची की सड़कों पर सजी यह सांस्कृतिक झांकी इंटरनेट पर भी चर्चा का विषय बन गई।

मोरहाबादी से लेकर हटिया तक, हर जगह स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों — सभी ने पारंपरिक धुनों की ताल पर झूमकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और भी जीवंत बना दिया। उपस्थित लोगों ने कहा कि यह कार्यक्रम झारखंड की पहचान, परंपरा और एकता का प्रतीक है। यह न केवल झारखंड की सांस्कृतिक समृद्धि का परिचायक है, बल्कि राज्य की युवा पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है।

राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर रांची की सड़कों पर गूंजते लोकगीत और झूमते कलाकारों ने यह संदेश दिया कि झारखंड की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है, और यह संस्कृति ही राज्य की असली ताकत है।

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