मकर संक्रांति पर्व एवं धनुर्मास महोत्सव का भव्य समापन, दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में विशेष अनुष्ठान
रांची। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में 15 जनवरी, गुरुवार को माघ मास कृष्णपक्ष की द्वादशी तिथि के शुभ संयोग में संक्रांति पुण्यकाल और ब्रह्ममुहूर्त की उत्तम वेला में भव्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और वैदिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर धनुर्मास महोत्सव का भी विधिवत समापन किया गया।
प्रातःकालीन मधुर प्रभात में आयोजित अनुष्ठानों का शुभारंभ भगवान श्री वेंकटेश्वर के विश्वरूप दर्शन, सुप्रभातम् और मंगलाशासनम् के साथ हुआ। इसके पश्चात करावलंबम्, वेंकटेश ध्यानम्, वेंकटेश स्तोत्रम्, वेंकटेश प्रपत्ति एवं संकट हरण स्तुति का विधिपूर्वक पाठ किया गया। पंचरात्र आगम विधान एवं पूर्ण सनातन वैदिक परंपरा के अनुसार सभी उपचारों का क्रमबद्ध संपादन किया गया।
इसके उपरांत सहस्त्रधारा, कलशधारा, शंखधारा एवं चक्रधारा के पवित्र पात्रों से दूध, दधि, शहद, डाभयुक्त जल तथा गंगा-गंडकी संगम के परम पवित्र जल से मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान का भव्य महाभिषेक संपन्न हुआ। भगवान के मूल विग्रह, उत्सव विग्रह, भोग विग्रह, शालिग्राम भगवान, श्रीदेवी लक्ष्मी, श्रीभूमिदेवी लक्ष्मी एवं चक्रराज सुदर्शन को सुगंधित चंदन का अनुलेपन किया गया। इसके बाद हल्दी उबटन लगाकर पुनः अभिषेक किया गया तथा तेल एवं इत्र से मार्जन कर रेशमी वस्त्र और भव्य आभूषणों से अलंकरण किया गया। महाआरती के पश्चात गूंजते वेद मंत्रों के बीच महास्तुति की गई, जिससे सम्पूर्ण मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा।
दिनभर श्रद्धालुओं के लिए सूजी का हलवा एवं लड्डू महाप्रसाद का वितरण निरंतर होता रहा।
धनुर्मास–श्रीगोदा महोत्सव का विधिवत समापन
अनुष्ठानों के दूसरे चरण में विगत एक माह से चल रहे धनुर्मास–श्रीगोदा महोत्सव के समापन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत पुण्याहवाचन से हुई। इसके पश्चात भगवान रंगनाथ एवं उनकी प्रेयसी जगत् जननी गोदाम्बा जी की पंचोपचार पूजन-आराधना कर मांगल्य प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। भगवान और भगवती को रक्षा सूत्र धारण कराया गया तथा विधिविधान से भगवती गोदा को मंगलसूत्र धारण कराया गया।
अक्षता रोपन की विधि के अंतर्गत पहले भगवान के हाथ में, फिर गोदा देवी के हाथों में, तत्पश्चात भगवान और देवी के सिर पर तथा चरणों में अक्षत अर्पित किए गए। दिव्य मंत्रोच्चार और मंगल गीतों के मधुर स्वर के बीच भगवान रंगनाथ और भगवती गोदा देवी को वरमाला धारण कराई गई। इस प्रकार पारंपरिक वैष्णव विधियों के साथ भगवान रंगनाथ एवं भगवती गोदा देवी का दिव्य विवाह संपन्न हुआ और धनुर्मास तिरुप्पावै व्रत का विधिवत समापन हुआ।
इस महाभिषेक के यजमान श्री निहार तुलस्यान एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पायल तुलस्यान (तुलस्यान ज्वेलर्स, रांची) रहे, जबकि दिनभर के भोग की व्यवस्था श्री प्रदीप मोदी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता मोदी (रांची) द्वारा की गई।
पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही और मंदिर परिसर भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण दिखाई दिया।
Reviewed by PSA Live News
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10:08:00 pm
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